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'पापा जल्दी लौट आना, डर लग रहा है'

Wed, 07 Jan 2015 08:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मानकनगर स्थित आरडीएसओ कॉलोनी में मंगलवार को 13 साल के एक बच्चे उमेश यादव की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। उनकी लाश कमरे में बिस्तर पर मिली। करीब में उमेश की बेल्ट और एक अंगोछा भी पड़ा मिला, जिससे उसका गला घोंटा गया था। जबकि उसका नया मोबाइल गायब था।
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सिविल डायरेक्ट्रेट, आरडीएसओ में हेल्पर जंग प्रसाद ने बहराइच के जरवल रोड स्थित अटवा गांव में रहने वाले अपने भाई राम सुघर के छोटे बेटे उमेश को गोद लिया था। उमेश आरडीएसओ स्थित जंग प्रसाद के मकान में रहकर पढ़ाई करता था। मंगलवार सुबह करीब 7:30 बजे जंग प्रसाद ड्यूटी पर चले गए।

दोपहर करीब 12:15 बजे लंच टाइम में घर लौटे। दरवाजा खोलते ही उन्हें उमेश की लाश कमरे में बिस्तर पर पड़ी मिली। इसके बाद जंग प्रसाद ने साथी कर्मचारी सर्वेंद्र कुमार को फोन करके बुलाया। फिर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने पंचनामा भरवाकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
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पापा जल्दी लौट आना, डर लग रहा

जंग प्रसाद सुबह ड्यूटी के लिए तैयार होने लगे तो उमेश भी जग गया। जंग बहादुर ने बताया कि उमेश ने उनसे अंतिम बार यही कहा था कि पापा आज जरा जल्दी घर चले आना, मुझे कुछ डर लग रहा है। वह उमेश की बातों को समझ नहीं सके।

हालांकि उसकी चिंता उन्हें सता रही थी। इसीलिए लंच टाइम में सबसे पहले भागकर वह घर पहुंचे, लेकिन इससे पहले ही उमेश का कत्ल किया जा चुका था। उमेश को यह डर किससे था और वह क्यों अकेला घर में नहीं रहता था, पुलिस देर रात तक इन सवालों का जवाब तलाशती रही।

एसओ मानकनगर ने बताया कि उमेश ने कुछ दिन पहले ही एक मोबाइल फोन खरीदा था, जो गायब है। हत्या करने के बाद कातिल इसे अपने साथ उठा ले गए, जबकि घर में शेष सभी सामान सुरक्षित मिले हैं।

इन दिनों उमेश के अलावा जंग प्रसाद के घर में एक अन्य रिश्तेदार का बेटा प्रदीप भी रह रहा था। जंग प्रसाद की पत्नी मायावती शनिवार से अपने गांव गई हुई है। मंगलवार सुबह उमेश की आखिरी मुलाकात प्रदीप से ही हुई थी। सुबह करीब साढ़े नौ बजे प्रदीप कॉलेज चला गया था।
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आठ माह से था ताऊ के साथ

जंग प्रसाद की अपनी कोई औलाद नहीं है। इसलिए भाई राम सुघर ने अपने सबसे छोटे बेटे उमेश की जिम्मेदारी जंग प्रसाद को ही सौंप दी थी। उमेश पिछले आठ महीने से जंग प्रसाद के साथ था। इसी वर्ष उसका दाखिला मानकनगर इंटर कॉलेज में कक्षा छह में कराया था।

जंग प्रसाद ने बताया कि वह उमेश की सारी इच्छाएं पूरी करना चाहते थे। इसीलिए उसकी डिमांड पर उसे फोन खरीदने के लिए चार हजार रुपये दिए थे। तीन दिन पहले ही नेट शॉपिंग के जरिये उसने मोबाइल फोन खरीदा था। कहता था इससे वह अपने बड़े भाई नेम कुमार और रमेश कुमार से बात करता रहेगा।

जंग प्रसाद के घर में रखने वाले प्रदीप ने बताया कि वह मूल रूप से बहराइच में जरवल रोड स्थित अटवा गांव का रहने वाला है। वह यहां पर डीएवी कॉलेज में इंटर का छात्र है। उसके पिता सियाराम किसान हैं। पढ़ने के लिए ही वह लखनऊ में रहता है। पहले लोको कॉलोनी में एक रिश्तेदार के घर रहता था। वहां से कॉलेज दूर पड़ता था इसलिए जंग प्रसाद के घर आकर रहने लगा।
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