प्रदेश सरकार अब गरीब कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए क्रेच बनवाने जा रही है।
प्रदेश में तीन हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में क्रेच विकसित किया जाएगा।
इसमें छह वर्ष तक के बच्चों को अनुपूरक पोषाहार, दोपहर का भोजन व शाम का नाश्ता दिया जाएगा। क्रेच दिन में आठ घंटे खुलेंगे।
इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में एक अतिरिक्त वर्कर भी रखी जाएंगी। गरीब कामकाजी महिलाओं को अक्सर अपने छोटे बच्चों के कारण कार्य में बहुत दिक्कत आती है।
कुछ महिलाएं बच्चों को काम-काज के दौरान साथ लेकर जाती हैं तो वे इस दौरान अपने बच्चों का ख्याल नहीं रख पाती हैं।
इस कारण बच्चे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। ऐसी ही महिलाओं के लिए सरकार क्रेच बनवाने जा रही है।
बाल विकास एवं पुष्टहार मंत्री राम गोविंद चौधरी ने विभाग के अधिकारियों को शीघ्र ही इस योजना को अमली जामा पहनाने के निर्देश दिए हैं।
क्रेच में छह माह से लेकर छह वर्ष तक के बच्चों की देखभाल की जाएगी। इनमें भी तीन वर्ष तक के बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। प्रत्येक क्रेच में 15 बच्चों के देखभाल की व्यवस्था की जाएगी।
क्रेच खोलने के लिए प्रदेश के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों व प्रभारियों से स्थानों का चयन कर बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशालय भेजने के लिए कहा गया है।
कहा गया है कि क्रेच ऐसी जगह खोला जाए जिससे ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को इसका लाभ मिल सके।
ये होंगी सुविधाएं
क्रेच के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों में 150 से 175 वर्गफुट का एक अतिरिक्त कक्ष बनाया जाएगा। इसमें बच्चों के आराम करने, खेलने व सीखने के इंतजाम किए जाएंगे।
आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों, सहायिकाओं व अतिरिक्त क्रेच वर्कर को बच्चों की देखभाल के लिए सरकार अलग से प्रशिक्षित भी कराएगी।
मनरेगा से भी ली जाएंगी महिलाएं
ग्रामीण इलाकों में खुलने वाले क्रेच में जब तक अतिरिक्त क्रेच वर्कर नहीं नियुक्त हो जाती है तब तक मनरेगा के तहत महिला जॉब कार्ड धारकों को इसमें रखा जाएगा।
यही महिलाएं क्रेच में बच्चों की देखभाल करेंगी। प्रत्येक क्रेच में ऐसी दो महिलाएं रखी जाएंगी।