लखनऊ में चौक निवासी सबीना (बदला नाम) निजी स्कूल में शिक्षिका हैं। वह एक बच्चे की मां हैं और दूसरा नहीं चाहती हैं। पति ने सास से बात करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि नसबंदी नहीं कराई जा सकती है। ऐसे में सबीना ने विकल्प के रूप में ‘अंतरा’ को चुना।
इसके बारे में वह साथी शिक्षिका से सुन चुकी थीं। सबीना ने अवंतीबाई महिला चिकित्सालय में यह गर्भनिरोधक इंजेक्शन लगवाया। हर तीसरे माह वह इंजेक्शन लगवाती हैं। उन्हें कोई समस्या नहीं है। सबीना की तरह तमाम महिलाएं अंतरा को पसंद कर रही हैं। राजधानी में इसका इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है।
दिसंबर 2018 में गर्भनिरोधक के रूप में अंतरा इंजेक्शन की शुरुआत हुई। इसमें न अस्पताल में देर तक रुकने की जरूरत पड़ती है और न ही रोज-रोज दवा खाने का झंझट है। घूमने के लिए निकलते वक्त भी यह इंजेक्शन लगवाया जा सकता है। यह राजधानी के सभी महिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है।
दिसंबर 2018 में हुई इंजेक्शन की शुरुआत
प्रतीकात्मक तस्वीर
लखनऊ में चौक निवासी सबीना (बदला नाम) निजी स्कूल में शिक्षिका हैं। वह एक बच्चे की मां हैं और दूसरा नहीं चाहती हैं। पति ने सास से बात करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि नसबंदी नहीं कराई जा सकती है। ऐसे में सबीना ने विकल्प के रूप में ‘अंतरा’ को चुना।
इसके बारे में वह साथी शिक्षिका से सुन चुकी थीं। सबीना ने अवंतीबाई महिला चिकित्सालय में यह गर्भनिरोधक इंजेक्शन लगवाया। हर तीसरे माह वह इंजेक्शन लगवाती हैं। उन्हें कोई समस्या नहीं है। सबीना की तरह तमाम महिलाएं अंतरा को पसंद कर रही हैं। राजधानी में इसका इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है।
दिसंबर 2018 में गर्भनिरोधक के रूप में अंतरा इंजेक्शन की शुरुआत हुई। इसमें न अस्पताल में देर तक रुकने की जरूरत पड़ती है और न ही रोज-रोज दवा खाने का झंझट है। घूमने के लिए निकलते वक्त भी यह इंजेक्शन लगवाया जा सकता है। यह राजधानी के सभी महिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है।
18 से 45 साल की महिलाओं के लिए
प्रतीकात्मक तस्वीर
तेजी से बढ़ रही मांग, आपूर्ति कम
परिवार कल्याण स्टोर से मांग के अनुसार इस इंजेक्शन की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। एसीएमओ डॉ. अनूप कुमार ने बताया कि जनवरी 2019 में जिलेभर में 261 महिलाओं ने यह इंजेक्शन लगवाया था, जुलाई में यह आंकड़ा 830 तक पहुंच गया। इस तरह अप्रैल से अब तक 2,666 महिलाओं को पहली डोज दी जा चुकी है। अगस्त में इसकी मांग करीब 25 फीसदी बढ़ गई है। सीएमएसडी स्टोर से इसकी मांग की गई है।
सरकारी अस्पतालों में अंतरा मुफ्त है। गर्भनिरोधक इंजेक्शन से स्तनपान कराने वाली महिलाओं पर किसी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। 18 से 45 साल की उम्र की महिलाएं इसे लगवा सकती है।
पूरी तरह से सुरक्षित है अंतरा
प्रतीकात्मक तस्वीर
अंतरा इंजेक्शन का बढ़ता इस्तेमाल
अस्पताल जनवरी जुलाई
सभी पीएचसी 9 589
सभी सीएचसी 59 206
अवंतीबाई महिला अस्पताल 0 57
झलकारीबाई महिला अस्पताल 0 56
क्वीन मेरी 20 11
नसबंदी का अहम विकल्प
राजधानी के कुछ खास इलाकों में इसकी मांग ज्यादा है। जो नसबंदी को पसंद नहीं करते, उनमें इसका क्रेज है। मुख्य स्टोर से हर माह करीब 25 फीसदी अधिक मांग भेजी जा रही है। इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है। - डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ
पूरी तरह से सुरक्षित है अंतरा
अंतरा पूरी तरह से सुरक्षित है। जब चाहे इंजेक्शन रोक कर गर्भधारण किया जा सकता है। इसमें प्रोेजेस्ट्रोजन होता है। इससे ओवेलेशन (अंडोत्सर्जन) नहीं होता है। इस वजह से निषेचन नहीं होता और गर्भ नहीं ठहरता है। - डॉ. गीता, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ