भाजपा ने विधानसभा के इस चुनाव के वक्त जारी संकल्प पत्र में गोधन योजना शुरू कर गरीब किसानों को गाय और अन्य दुधारू पशु देने का वादा किया था। प्रदेश में लगभग दो करोड़ सीमांत एवं लघु किसान हैं। ये गरीब किसान की ही श्रेणी में आते हैं। वृंदावन के कार्यक्रम में यूपी के हर गरीब किसान को दो स्वस्थ गाय देने का एलान जहां संकल्प पत्र के वादे पर योगी सरकार के अमल की प्रतिबद्धता का संदेश देने की कोशिश लगती है तो कहीं न कहीं इसके पीछे इन दो करोड़ किसानों को लोकसभा 2019 के मद्देनजर भाजपा के साथ लामबंद करने का भी प्रयास है।
आमतौर पर देसी गायों को पालने से लोग कतराते हैं क्योंकि ये अपेक्षाकृत कम दूध देती हैं। शायद मुख्यमंत्री ने इसीलिए लगे हाथ कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान केंद्र एवं गौ-अनुसंधान विश्वविद्यालय को गायों की भारतीय नस्लों (देसी गायों) में सुधार कर उन्हें 10-15 लीटर दूध देने लायक बनाना चाहिए।
जाहिर है, सरकार की निगाह गाय के सहारे एजेंडे को धार देने के साथ इस बात पर भी है कि लोग इन्हें पालने को उत्साहित हों। देसी गायें अगर अधिक दूध देने लगीं तो लोग उसे पालने में रुचि लेंगे। छुट्टा नहीं छोड़ेंगे।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी का यह कहना कि गांव, गाय और गंगा को बचाए बिना राष्ट्र नहीं बचेगा। सरकार ने बीते आठ महीने में बूचड़खाने बंद कराए हैं। गौ-तस्करी रोककर गौ-संरक्षण किया है। अब आवारा पशुओं से किसानों को हो रहे नुकसान से बचाने की योजना तैयार की जा रही है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल का गाय को भारतीय संस्कृति की पहचान बताना यह साबित करता है कि भगवा टोली इस मुद्दे पर काफी गंभीर है। गाय और गंगा एक तरह से सभी हिंदुओं की धार्मिक दिनचर्या से जुड़ा मुद्दा है। भगवा टोली इसे समझती है।
उसे पता है कि भाजपा से इस मुद्दे पर समाज की विशेष अपेक्षाएं हैं। इसीलिए मुख्यमंत्री ने इस मुददे पर गहरे निहितार्थ वाले संदेश देने की कोशिश की है। उनका गाय के गोबर से रसोई गैस के उत्पादन सहित गौमूत्र और पंचगव्य पर शोध करने का सुझाव तथा प्रत्येक विकास खंड में गौशाला खोलने का एलान और गरीब किसानों को दो गाय देने की बात गौवंश की रक्षा और संवर्धन के साथ आगे के चुनावी समीकरण साधने की कोशिश का भी हिस्सा नजर आती है।