केजीएमयू के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ गई है। यहां के सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च के शोधपत्र में पौधों से वैक्सीन बनाने की बात कही गई थी। अब नामी निजी कंपनी तंबाकू प्रजाति के परिवार वाले पौधों से कोविड-19 की वैक्सीन बना रही है। सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च के पेपर में पौधों से प्रभावी और सस्ती वैक्सीन बनाने का विकल्प दिया था। यह पेपर पिछले साल दिसंबर में प्रकाशित हुआ था। अब एक साल बाद इस पर वैक्सीन बनाने की शुुरुआत हो चुकी है।
कोविड-19 के लिए दुनिया भर में कई वैक्सीन ईजाद की जा चुकी हैं। ज्यादातर एनीमल सेल से तैयार हुई हैं। इनके मुकाबले पौधों पर आधारित वैक्सीन तैयार करने का विकल्प दिया गया है। पौधे आधारित विकसित होने वाली वैक्सीन को सीओवीएलपी नाम दिया गया है। इसमें निकोटियाना बेंचमियाना पौधे का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह पौधा सामान्य बोलचाल की भाषा में तंबाकू के पौधे की रिश्तेदार प्रजाति का है। वैक्सीन बनाने में स्पाइजीन को प्लांट में क्लोन कर दिया जाता है। इसके बाद उसमें प्रोटीन बनने लगते हैं। इसे प्योरीफाई कर कोविड-19 के टीके के रूप में उपयोग किया जाएगा। टीका बनाने की प्रक्रिया के बाद इसका ट्रायल शुरू कर दिया गया है।
तीसरी पीढ़ी के टीके के रूप में पौधे आधारित टीकों का उपयोग किया जा सकता है
केजीएमयू के सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च के प्रो. शैलेंद्र सक्सेना के साथ शोधपत्र में डॉ. कुलदीप धर्मा, डॉ. सेंथिल कुमार, डॉ. मो. इकबाल, डॉ. शैलेंद्र कुमार पटेल, डॉ. रुचि तिवारी और डॉ. हर्पण शामिल हैं। ये देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से हैं। शोधपत्र में बताया गया कि तीसरी पीढ़ी के टीके के रूप में पौधे आधारित टीकों का उपयोग किया जा सकता है। ये पहले के मुकाबले काफी सस्ती होंगे।
शोधपत्र में यह भी बताया गया कि तंबाकू के पौधे से इबोला, आलू के पौधे से टिटनस, डायरिया, हेपेटाइटिस बी, एनीमिया तथा टमाटर के पौधे से सार्स और निमोनिया के टीके तैयार किए जा चुके हैं। इसी तरह कोविड-19 वैक्सीन के लिए निकोटियाना बेंचमियाना पौधे का उपयोग किया जा सकता है। वैक्सीन बनने की शुरुआत होने पर विकीपीडिया पर मौजूद पेज में बाकायदा शोधपत्र का हवाला भी दिया गया है। प्रो. शैलेंद्र सक्सेना ने शोध के प्रोत्साहन दिए जाने पर केजीएमयू कुलपति ले. जनरल डॉ. बिपिन पुरी को धन्यवाद दिया है।