बीते साल की शुरुआत में हुई भर्ती परीक्षा के बाद राज्य सरकार ने इसमें अर्हता अंक सामान्य वर्ग के लिए 65 और आरक्षित वर्ग के लिए 60 फीसदी तय कर दी थी। इसके खिलाफ एकल पीठ में कई याचिकाएं दायर हुईं और उक्त निर्देश दिए गए थे।
बीते शनिवार को मामले की फाइनल सुनवाई जारी रही। याचियों के वरिष्ठ वकील प्रशांत चंद्रा के सुझाव पर और हाल ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर अदालत ने मौखिक बहस को सीमित करने के लिए संबंधित पक्षकारों के वकीलों को लिखित बहस 23 जनवरी तक दाखिल करने के निर्देश दिए, जिससे इस मामले का जल्द निस्तारण किया किया जा सके। इस भर्ती मामले में अभ्यर्थी राजधानी में धरना-प्रदर्शन भी कर चुके हैं।