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भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही यूपी सरकार: हाईकोर्ट

Tue, 16 Sep 2014 01:39 AM IST
सुधीर कुशवाहा/अमर उजाला, लखनऊ
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भ्रष्टाचार के मामलों में बड़े अफसरों पर मुकदमा चलाने की अनुमति न देने पर सीबीआई की विशेष अदालत ने प्रदेश सरकार को जमकर फटकारा। विशेष न्यायाधीश राजेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 का दुरुपयोग कर रही है। इसलिए इस अधिनियम में बदलाव बेहद जरूरी है। कोर्ट ने अफसरों के खिलाफ लचर पैरवी करने पर सीबीआई को भी लताड़ लगाई।
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मामला 1998 में सूचना विभाग में समूह ‘ग’ भर्ती का है। इस मामले में तत्कालीन सूचना निदेशक आईएएस अधिकारी महेश कुमार गुप्ता, तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर राज गोपाल सिंह वर्मा, अपर निदेशक प्रभात कुमार सिन्हा व अखिलेश चंद्र शुक्ला पर आरोप लगे थे।

सरकार ने इस मामले में महेश गुप्ता के खिलाफ अभियोजन की अनुमति नहीं दी थी। अदालत ने सोमवार को अपने फैसले में राजगोपाल को दोषी मानते हुए उन्हें सात साल के कारावास और दो लाख जुर्माने की सजा सुनाई। जबकि अपर निदेशक प्रभात कुमार सिन्हा व अखिलेश चंद्र शुक्ला को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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क्या है मामला

हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2003 को सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय के तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर मधु जोशी को समूह- ग की भर्ती में रिश्वत लेने व रिजल्ट शीट समेत अन्य अभिलेख गायब होने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया।

इस पर मधु जोशी ने हजरतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। 1998-2000 के दौरान महेश कुमार गुप्ता निदेशक, राज गोपाल सिंह वर्मा उप निदेशक तथा प्रभात कुमार सिन्हा अपर निदेशक के पद पर तैनात थे।

आरोपियों ने अभ्यर्थियों से पैसे लिए और आपराधिक षड्यंत्र किया। दरअसल समूह- ग की भर्तियों के लिए महेश कुमार गुप्ता को नियुक्ति प्राधिकारी, प्रभात कुमार सिन्हा चेयरमैन और राजगोपाल सिंह वर्मा को विभिन्न श्रेणी के पदों की भर्ती का नोडल अधिकारी बनाया गया था।
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