छावनी के बूचड़ी मैदान में बन रही सेना की वैवाहिक आवासीय योजना के विस्तार में स्वीकृति से कई गुना मिट्टी की खोदाई कर दी गई।
बड़े पैमाने पर हुए मिट्टी के खनन से सेना के बड़े अफसर भी अनजान रहे। यहां काम कर रही निजी कम्पनी के खिलाफ अब सेना ने जांच और तेज कर दी है।
मामला बड़ा होता देख अब जांच मध्य यूपी सब एरिया की जगह मध्य कमान मुख्यालय को सौंप दी गई है। सेना इस बड़े मामले के खुलासे के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी भी गठित करने जा रही है।
अनुमान है कि यहां करीब छह सौ ट्रक मिट्टी अवैध तरीके से खोदकर कहीं बाहर भेज दी गई। हालांकि सेना के बड़े अफसर तक इस मामले में खामोश हैं। हर कोई मामले से अपना पल्ला झाड़ रहा है।
बीती 23 जुलाई को यहां स्थित सेना की पुरानी फायरिंग रेंज में मिट्टी का विशालकाय टीले का एक हिस्सा ढहने से अर्जुनगंज के मचलखेड़ा के पांच मजदूरों की दबकर मौत हो गई थी। जबकि दो लोग इस हादसे में बच गए थे।
हादसे के बाद से पुलिस और सेना यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि सभी मृतक यहां वर्षों पुरानी हुई फायरिंग के कारतूस बीनने के लिए आए थे।
सेना ने इस बड़े हादसे से पल्ला झाड़ लिया लेकिन मौके पर करीब सात सौ ट्रक मिट्टी का खनन देख सैन्य अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। हकीकत का पता लगाने के लिए सेना ने इस हादसे में बचने वाले रज्जन के घर जाकर उससे पूछताछ की थी।
पूछताछ में रज्जन ने बताया था कि एक ठेकेदार उन सात लोगों को मिट्टी की खोदाई करने के लिए साथ लेकर गया था। इसके लिए 200 रुपये और दिन का खाना देने की बात ठेकेदार ने कही थी।
मिट्टी की खोदाई के बाद ठेकेदार ट्रैक्टर ट्राली लेने के लिए वहां से चला गया इस बीच यह हादसा हो गया। रज्जन से पूछताछ के बाद मध्य यूपी सब एरिया के क्यू ब्रांच ने मामले की जांच शुरू की थी।
इस बीच मध्य कमान मुख्यालय के अधिकारियों ने भी घटनास्थल का दौरा किया। यहां गायब हुई मिट्टी का जब अंदाजा लगाया गया तो सैन्य अफसरों के पैरों के नीचे से जमीन ही खिसक गई।
मध्य यूपी सब एरिया ने जब जांच की तो पता चला कि वैवाहिक आवासीय योजना के लिए भूमि को समतल बनाने के लिए करीब 120 ट्रक मिट्टी की खोदाई की स्वीकृति दी गई थी।
जबकि मौके पर करीब सात सौ ट्रक मिट्टी की खोदाई का अनुमान लगाया जा रहा है। मध्य यूपी सब एरिया ने सम्बन्धित कम्पनी के अधिकारियों को उनकी टेंडर की शर्तों के कागजात लेकर तलब किया था। कई नोटिस दी लेकिन आज तक कम्पनी का कोई प्रतिनिधि आया ही नहीं।