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विवादित बयान देकर फंसे AMU के VC

Sat, 15 Nov 2014 12:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में छात्राओं को पुस्तकालय में प्रवेश से रोकने के मामले में हाईकोर्ट ने कुलपति जमीरउद्दीन शाह और रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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उनसे दो सप्ताह में आरोपों पर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है। याचिका पर 24 नवंबर को अगली सुनवाई होगी। विधि छात्रा दीक्षा द्विवेदी और अन्य द्वारा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि विश्वविद्यालय में ऐसा कोई नियम नहीं बना सकता है जो लिंग के आधार पर भेदभाव करता हो।

याचिका में कहा गया कि एएमयू के कुलपति ने मौलाना आजाद पुस्तकालय में छात्राओं को प्रवेश की अनुमति नहीं दी क्योंकि उनका मानना है कि लड़कियों को प्रवेश देने से भीड़ अधिक होगी और छात्रों का ध्यान भटकेगा।
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कोर्ट ने कहा, संवैधानिक अधिकारों का हनन

कोर्ट का कहना था कि ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों को विवेकपूर्ण निर्णय लेना चाहिए। लिंग के आधार पर किसी को रोकना, उसके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

ऐसा करना समानता के अधिकार का भी हनन है। खंडपीठ ने कहा कि याचिका एक अखबार में प्रकाशित खबर को आधार बनाकर दाखिल की गई है इसलिए विश्वविद्यालय का पक्ष आना आवश्यक है।

कुलपति और रजिस्ट्रार से दो सप्ताह में इन आरोपों का स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है। खंडपीठ ने अदालत में सुनवाई से पूर्व इससे संबंधित समाचार के प्रकाशन को भी सही नहीं माना है।
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