मैगी में सेहत के लिए घातक लेड की मानक से ज्यादा मिलावट के मामले में बाराबंकी में शनिवार को दो केस दर्ज किए गए। एफएसडीए ने एसीजेएम कोर्ट में नेस्ले इंडिया, ईजी-डे समेत छह पक्षों पर मुकदमा दर्ज कराया तो सीजेएम कोर्ट में नेस्ले इंडिया, महानायक अमिताभ बच्चन, अभिनेत्री माधुरी दीक्षित और प्रीति जिंटा पर दर्ज हुआ।
एफएसडीए ने मैगी में घातक मिलावट करने व लोगों के प्रति जानबूझकर धोखाधड़ी करने को लेकर एसीजेएम प्रथम वीरभद्र सिंह की अदालत में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 26 (2) के उल्लंघन का परिवाद दायर किया है।
इस मामले में एक जुलाई को सुनवाई होगी। गौरतलब है कि मैगी में मिलावट का खुलासा सबसे पहले बाराबंकी में ही हुआ था। खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय सिंह ने बताया कि एसीजेएम ने परिवादी को सुनने के बाद आदेश में कहा कि इस मामले में प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद है।
अदालत ने अभियुक्तों के खिलाफ समन जारी कर एक जुलाई को कोर्ट में उपस्थित होने को कहा है। उन्होंने बताया कि मैगी में घातक लेड की मिलावट मानक से काफी ज्यादा पाए जाने पर केस दर्ज कराया गया है।
शुक्रवार को हुए थे नमूने सील
मैगी के खिलाफ देशव्यापी नमूना सैंपलिंग की कार्रवाई के तहत शुक्रवार देर शाम एफएसडीए टीम ने लखनऊ के कपूरथला में स्पेंसर स्टोर से मैगी व नूडल्स के एक अन्य उत्पाद के दो नमूने लैब टेस्टिंग के लिए सील किए।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी एसपी सिंह की अगुवाई में मैगी के अलावा चिक्स ब्रांड हाट गार्लिक इस्टेंट नूडल का नमूना भी लिया। लैब की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पिछले दिनों बाराबंकी के ईजी-डे मॉल से ही मैगी के जब्त नमूने में लेड की मिलावट मानक से काफी ज्यादा पाई गई थी। जांच में लेड के अलावा मोनो सोडियम ग्लूटामेंट (एमएसजी) भी मिला जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है।
क्या था मामला
बाराबंकी स्थित ईजीडे माल में खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने दस मार्च 2014 को मैगी का नमूना लेकर उसे पहले गोरखपुर और फिर कोलकाता भेजा था। जांच के दौरान मैगी में सेहत के लिए नुकसानदेह तत्व सीसा और ग्लूटामेट बेहद खतरनाक स्तर तक पाये गये थे। उसके बाद बाराबंकी के खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन से मुकदमा चलाने के लिए अनुमति मांगी थी।
मैगी में लेड की मात्रा ज्यादा मिलने से पूरे देश में नमूने लेकर इसकी जांच की कार्रवाई की जा रही है। ये लेड नुकसानदायक स्तर पर है, जो खासकर बच्चों की सेहत के लिए खतरनाक है।
केंद्र सरकार ने भी मैगी की गुणवत्ता से जुड़े मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा था कि इस मामले की जांच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकारण (FSSAI) से करायी जाएगी।
उपभोक्ता मामले से जुड़े मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि इसके अलावा अगर इस मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग (एनसीडीआरसी) में कोई शिकायत दर्ज की जाती है तो इस पर एक विशेष उपभोक्ता वर्ग की ओर से कार्रवाई का मामला शुरू किया जा सकता है।