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मरीजों की जेब हो रही ढीली, 15 फीसदी तक अधिक चुकाने पड़ रहे दवाओं के दाम

Thu, 17 Sep 2020 11:52 AM IST
लखनऊ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : demo
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कोरोना काल में लखनऊ में दवाओं के दाम करीब 15 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इससे थोक व फुटकर कारोबारियों के बीच कमीशन कम हो गया है। ऐसे में तय खुदरा मूल्य के अलावा मरीजों को मिलने वाली छूट बंद हो गई है। दो माह पहले दवा खरीदने वाले अब ज्यादा कीमत चुका रहे हैं।
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राजधानी में करीब 4000 थोक व फुटकर मेडिकल स्टोर हैं। इनमें 850 थोक की दुकानों ने दवा कंपनियों की एजेंसी ले रखी है। गोदाम से सीधे इन एजेंसियों के माध्यम से दवाओं की सप्लाई होती है। सामान्य दिनों में करीब 30 करोड़ का कारोबार होता है, जो इन दिनों घटकर 10 करोड़ तक पहुंच गया है।

हालांकि, ग्लव्स, सैनिटाइजर और मास्क के कारोबार ने रफ्तार पकड़ी है। हालांकि, यह 10 करोड़ से आगे नहीं बढ़ पाया है। दवा कारोबारियों का कहना है कि कोरोना काल में ओपीडी बंद होने से दवाओं की बिक्री थमी है। सिर्फ  इमरजेंसी वाले ही दवाएं ले रहे हैं।
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बैच बदलने के साथ बढ़ गई कीमत

कारोबारियों ने बताया कि हर साल बैच नंबर बदलने पर दवाओं की कीमत बढ़ जाती है। इस साल कोरोना के बावजूद कुछ का 15 प्रतिशत तक मूल्य बढ़ा है। हड्डियों के विकास, गठिया व जोड़ रोग के मरीजों को दी जाने वाली शेलकॉल ओएस की कीमत 180.20 से 213.45 रुपये हो गई है।

यह बढ़ोतरी करीब 15.57 फीसदी है। शेलकॉल एचसी के दाम 10, गले में खराश और सूजन, टांसिल में प्रयोग होने वाली जीरोडॉल की कीमत में करीब पांच, बीकोजिंक में 10 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। पैरासिटामॉल व डायबिटीज से जुड़ी दवाओं की कीमत में पांच-पांच फीसदी की वृद्धि हुई है।

प्रिंट मूल्य से करीब 30 से 40 फीसदी कम दर पर कंपनी थोक कारोबारियों को दवा सप्लाई करती है। कारोबारी बताते हैं कि कोरोना काल में ट्रांसपोर्ट सिस्टम प्रभावित होने से एजेंसी से थोक कारोबारी का कमीशन घट गया है। यही स्थिति थोक से फुटकर में है।

थोक से फुटकर दुकानों तक दवाएं पहुंचने के लिए एक से दो लोग लगाए गए हैं। इसकी कीमत फुटकर कारोबारी चुका रहे हैं। इस खर्च को वे मरीजों को दी जाने वाली छूट में कटौती कर निकाल रहे हैं। पहले नियमित तौर पर दवाएं खरीदने वालों को दुकानदार 10 से 15 प्रतिशत तक छूट दे देते थे, जो अब बंद है।

इधर, ऑनलाइन पर 30% तक छूट

कई कंपनियां दवा बाजार के ऑनलाइन कारोबार में उतर आई हैं। ये 10 से 30 प्रतिशत तक छूट का दावा कर रही हैं। कई कंपनियां दवा की बुकिंग पर डिलीवरी चार्ज भी नहीं ले रहीं। कई कंपनियां मनचाहे ब्रांड की दवाएं आपूर्ति कर रही हैं।

इनकी ओर से संबंधित ब्रांड के अनुसार छूट देने का दावा किया जा रहा है। खास बात यह है कि प्रमुख ब्रांड पर छूट कम है, लेकिन संबंधित साल्ट से दवा तैयार करने वाली नई कंपनियां ज्यादा छूट दे रही हैं। ऑनलाइन कारोबार में यह भी बताया जाता है कि संबंधित ब्रांड छूट पर लेने के लिए कहां संपर्क किया जा सकता है।
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20 प्रतिशत का मार्जिन कम  

कोरोना काल में कई दवाओं के नए बैच आते ही दाम बढ़ गए। ऐसी कंपनियों ने सीधे सप्लाई में भी रेट बढ़ा लिए हैं। फुटकर दुकान तक दवा पहुंचने के बाद मार्जिन घट गया है। कुल मिलाकर कंपनी से ग्राहक तक दवा पहुंचने के बीच करीब 20 प्रतिशत का मार्जिन कम हुआ है। कारोबारियों का कमीशन भी घटा है, जबकि ग्राहक को प्रिंट मूल्य के हिसाब से 10 फीसदी अधिक दर चुकानी पड़ रही है। दुकानदार से अब यह छूट न मिलने को लेकर विवाद भी होता रहता है। - गजनफर, प्रदेश महासचिव, द केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन

अधिक रेट पर दवा बेची तो कार्रवाई
बाजार में दवाओं की कोई कमी नहीं है। जिसकी कम सप्लाई होने की जानकारी मिलती है, तत्काल आपूर्ति की जाती है। मरीजों को हर तरह की दवाएं मिल रही हैं। दवा के नए बैच पर मूल्य सेंट्रल से तय होता है। निर्धारित मूल्य से अधिक दवा बिकने की कहीं शिकायत नहीं मिली है। जो भी प्रिंट रेट से अधिक दाम पर दवा बेचेगा, उस पर कार्रवाई होगी। - बृजेश कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर एफ एसडीए, लखनऊ
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