लखीमपुर की जिलाधिकारी को महज लेखपालों का भ्रष्टाचार रोक न पाने का कारण
बताते हुए शासन ने शुक्रवार को हटा दिया। लेकिन राजधानी लखनऊ की तहसीलों
में तैनात लेखपालों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
भ्रष्टाचार की कमाई से वे
करोड़पति बन गए हैं। करीब डेढ़ दर्जन चर्चित लेखपालों के किस्से तो खुद
अफसर सुनाते हैं। चल-अचल सम्पत्तियां अर्जित करने वाले इन लेखपालों की
हैसियत 10 करोड़ के पार पहुंच चुकी है।
वे आलीशान बंगलों में रहते हैं और
लग्जरी गाड़ियों में घूमते हैं। अब तो प्रॉपर्टी के धंधे में भी हाथ आजमा
रहे हैं। अफसरों की निगाह में होते हुए भी वे सारे गोरखधंधा कर रहे हैं
क्योंकि वे उनके चहेते हैं।
जमे हैं एक ही जगह
यही वजह है कि अधिकतम तीन साल की तैनाती के
नियम के बावजूद वे कई लेखपाल पिछले कई सालों से एक ही तहसील में जमे हुए
हैं।
इन लेखपालों की पहुंच इतनी है कि कोई
अफसर कार्रवाई की तैयारी करता है तो उसी पर गाज गिर जाती है। एक एसडीएम ने
भ्रष्टाचार में लिप्त लेखपालों को चिह्नित करने की हिम्मत जुटाई थी लेकिन
सूची तैयार होने से पहले उनका तबादला जिले से बाहर हो गया।
तहसील प्रशासन
से जुड़े सूत्रों की माने तो फौरी तौर पर इस सूची में ऐसे लेखपालों के नाम
शामिल किए गए थे जो दस करोड़ से अधिक की हैसियत वाले क्लब में शामिल हो
चुके थे।
सूची में शामिल ऐसे सभी लेखपाल प्रापर्टी डीलिंग से लेकर जमीनों
की पैमाइश, पट्टा, बैनामा से लेकर धारा 143 की कार्रवाई तक में जुटे थे।
बड़े अधिकारियों से साठगांठ कर ठेके पर पूरा काम कराने के एवज में मोटी
रकम ऐंठने में ये महारथी हैं। हालांकि भ्रष्टाचार के दम पर अकूत संपत्ति
बनाने वाले इन करोड़पति लेखपालों के नाम की सूची का अधिकृत तौर पर खुलासा
नहीं हो पाया।
गठजोड़ का मामला है
तहसील
में लेखपाल व अधिकारियों का गठजोड़ पूरी तरह हावी है। कई लेखपाल तो
अधिकारियों की कृपा से लेखपाल का कामकाज छोड़, बीते कई सालों से कानूनगो की
जिम्मेदारी निभा मोटी कमाई में लगे हैं।
इनमें 25 साल से एक ही तहसील में
जमा एक लेखपाल तो कानूनगो के सारे काम कर रहा है। पूरे सेवाकाल में वह
सिर्फ डेढ़ साल के लिए बीकेटी तहसील में स्थानान्तरित हुआ।
इसके अलावा पूरी
नौकरी अभी तक सदर तहसील में ही काटी है। कई जनप्रतिनिधियों की शिकायत के
बाद भी कोई जिलाधिकारी अथवा एसडीएम उसके खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं
जुटा पाया।
आरोपी को बख्शा नहीं जाएगातहसील
में कार्यरत किसी भी लेखपाल के खिलाफ व्यक्तिगत तौर पर भ्रष्टाचार संबंधी
कोई भी शिकायत मेरी जानकारी में नहीं है। किसी भी लेखपाल अथवा अन्य कर्मी
के खिलाफ गड़बड़ी की शिकायत पर कार्रवाई की जाएगी।
पूर्व एसडीएम द्वारा
भ्रष्टाचार के आरोपी लेखपालों की सूची तैयार करने संबंधी कोई जानकारी भी
मेरे संज्ञान में अभी तक नहीं आयी है।
-अनुराग यादव,
जिलाधिकारी