लखनऊ के माल ब्लॉक के खंडसरा गांव की सारिका पुत्री रामकुमार का विवाह पिछले वर्ष अप्रैल माह में धूमधाम से हुआ। दिसंबर में जब मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लाभ लेने के लिए सारिका को कुछ अधिकारियों की सहमति पर मंडप में बिठाया गया। तब जनप्रतिनिधियों ने इस बात का विरोध किया तो अधिकारियों ने सारिका को मंडप से शादी समारोह रोक कर उठा दिया।
हालांकि कागजों पर अधिकारियों ने फेरे करवा दिए। कुछ दिन बाद योजना के तहत 35 हजार रुपये का भुगतान सारिका के बैंक खाते में पहुंच गया। हालांकि, अमर उजाला ने खबर छपने के बाद समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण ने मामले का संज्ञान लिया और निदेशक समाज कल्याण को जांच करने के आदेश दिए हैं। साथ ही पूरे प्रदेश में इस योजना के लाभार्थियों की रैंडम जांच के भी निर्देश दिए गए हैं।
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सारिका की तरह निशा देवी पुत्री नेकराम, नीलम पुत्री मेवालाल, काजल पुत्री रामकृष्ण संग कई ऐसे अपात्रों को दिसंबर व जनवरी में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह का लाभार्थी बना दिया। ब्लॉक प्रमुख रामदेवी ने बताया कि इस मामले में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच का अनुरोध किया है। जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनीता सिंह ने बताया कि मामला बेहद गंभीर है। इसकी जांच की जा रही है। जो भी इसमें शामिल होगा, किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
दलाल ने मंडप में ले ली पासबुक, ब्लॉक में बाबू के पास है जमा
ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि रामकुमार राही ने बताया कि जनवरी में प्रियंका पुत्री रामंचद्र की शादी सर्वेश पुत्र श्यामलाल से जनवरी में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के दौरान हुई। प्रियंका से एक दलाल ने पैसा भुगतान के नाम पर मंडप में ही पासबुक ले ली। यह पासबुक ब्लॉक में एक बाबू के पास जमा है। उन्होंने बताया कि जब लाभार्थी का पैसा भुगतान होता है तो दलाल बैंक तक जाकर अपना हिस्सा ले लेते हैं। उन्होंने बताया कि दलाल गरीबों का डाटाबेस बनाकर काम करते हैं। उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हैं और कमीशन लेकर अधिकारियों को बांट देते हैं।
51 हजार की मिलती है मदद
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता पात्र बेटी को मिलती है। जिसमें 35 हजार रुपये लड़की के बैंक खाते में भेजे जाते हैं। दस हजार रुपये का गृहस्थी का सामान दिया जाता है। वहीं, छ: हजार रुपये शादी खर्च के लिए दिए जाते हैं।