विकास का कोटा और पत्थर पर नाम को लेकर नामित और निर्वाचित पार्षदों में विवाद गहरा गया। खुद को उपेक्षित महसूस करने वाले नामित पार्षद शोएब ने आत्मदाह की धमकी दी है।
इसको लेकर उन्होंने महापौर व नगर आयुक्त को पत्र भेजा है। समस्या का निदान न होने पर नगर निगम मुख्यालय में ही आत्मदाह करने की चेतावनी दी है।
नामित पार्षद का पत्र मिलने के बाद नगर आयुक्त ने तत्काल विवाद का समाधान का निर्देश अपर नगर आयुक्त, मुख्य अभियंता व वित्त एवं लेखाधिकारी को दिया है।
नामित पार्षद शोएब का कहना है कि विकास कार्य की जो पत्रावलियों नामित पार्षद बनवाते हैं, उनको गायब कर दिया जाता है। जो काम होते हैं उन पर निर्वाचित पार्षद का नाम लिखवाने का दबाव रहता है।
राजाजीपुरम-ई ब्लॉक में नए टैम्पो स्टैंड से पुराने टैम्पो स्टैंड तक नगरीय सड़क सुधार योजना में इंटलॉकिंग का कार्य प्रयास करके करवाया मगर उस पर पत्थर निर्वाचित पार्षद का लगवाने का प्रयास हो रहा है।
नामित पार्षदों को भी निर्वाचितों की तरह विकास का कोटा दिया जाना चाहिए ताकि जब वह कार्य कराएं तो उनका पत्थर लगे।
नामित पार्षदों को भी विकास कार्य का कोटा निर्वाचित पार्षदों की तरह मिले इसको लेकर पिछले नगर निगम सदन में काफी हंगामा हुआ था। कोटे को लेकर नामित और निर्वाचित पार्षद आमने-सामने आ गए थे।
वोटिंग के बाद यह तय हुआ था कि नामित पार्षदों को कोटा नहीं दिया जाएगा लेकिन उनके प्रस्ताव पर विकास कार्य कराए जाएंगे।
सदन में कांग्रेस, भाजपा व बसपा के पार्षदों का यह कहना था कि नामितों को कभी कोटा नहीं दिया गया। नगर निगम अधिनियम में भी इसकी कोई व्यवस्था नहीं है।
नगर निगम में 110 वार्ड हैं और 110 निर्वाचित पार्षद हैं। ऐसे में यदि नामित पार्षदों को भी कोटा दिया गया तो इससे विवाद होगा।