केजीएमयू में कोराना को लेकर हुई टास्क फोर्स की बैठक में डिजिटल ओपीडी चलाने का फैसला लिया गया है। इसके लिए सभी विभागों के दो-दो डॉक्टरों के फोन नंबर मांगे गए हैं। इन्हें सार्वजनिक किया जाएगा। संबंधित डॉक्टर ओपीडी में बैठकर मरीजों को फोन पर दवा बताएंगे।
इसके अलावा 70 प्रतिशत वार्ड खाली रखे जाएंगे। आइसोलेशन वार्ड में पोर्टेबल एक्स-रे का प्रबंध करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, इंडोक्राइन सर्जरी विभाग की ओपीडी बंद कर दी गई है। केजीएमयू में 4500 बेड हैं। तय किया गया कि 70 प्रतिशत वार्ड खाली रखे जाएंगे।
जांचों के लिए मरीजों को दो माह बाद की तारीख दी जाएगी। प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह के मुताबिक न्यूरो सर्जरी, दिल समेत दूसरे विभागों में गंभीर मरीज ही रहेंगे। मेडिसिन समेत दूसरे विभाग खाली कराए जाएंगे। वहीं, यदि किसी मरीज को आईसीयू की जरूरत पड़ रही है तो उसे पीजीआई रेफर किया जाएगा।
कोरोना को देखते हुए पीजीआई में अब इमरजेंसी वाले मरीज ही देखे जाएंगे। सामान्य ओपीडी वाले मरीजों में 80 फीसदी कटौती होगी। इसके लिए इमरजेंसी को अत्यंत गंभीर और गंभीर मरीज में बांट दिया है। संस्थान निदेशक प्रो. आरके धीमान ने बताया कि कोरोना को रोकने का यही तरीका है कि ओपीडी में भीड़ कम की जाए।
अत्यंत गंभीर और गंभीर मरीजों को इलाज मिलता रहेगा। सेमी इमरजेंसी के रूप में गर्भवती महिलाओं, कैंसर व अन्य मरीजों का इलाज होगा। सर्जरी के केस टाले जा रहे हैं। जिन्हें इसकी तारीख दी गई थी, उन्हेें अब दो माह बाद बुलाया जा रहा है। जिनकी स्थिति गंभीर है उन्हें पहले से दी तिथि पर ही बुलाया जा रहा है।
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