राहत भरी खबर, अक्तूबर के अंत तक कमजोर पड़ सकता है कोरोना
राजधानी में अक्तूबर अंत तक कोरोना वायरस कमजोर पड़ सकता है। इसके पीछे चिकित्सा विशेषज्ञों ने तर्क दिया है कि बारिश थमने के बाद नमी में कमी आने से संक्रमण की रफ्तार धीमी पड़ेगी।
साथ ही वर्तमान वृद्धिदर से पॉजिटिव मरीज मिलते रहे तो कुछ इलाकों में हर्ड इम्युनिटी भी विकसित हो चुकी होगी। इसके अलावा कुछ कंपनियों की ओर से टीका भी आने की संभावना है।
ऐसे में सर्दी का मौसम शुरू होते ही वायरस के प्रसार की गति धीमी हो सकती है। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों ने अभी कोरोना वायरस के खात्मे की संभावना से इनकार किया है।
राजधानी में हर माह चार से पांच गुना गति से कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अप्रैल तक 141 मरीज थे और मई में यह आंकड़ा 412 हो गया। जून में मरीजों की संख्या 1200 और जुलाई में 7607 हो गई।
जून की अपेक्षा जुलाई में छह गुना बढ़ोतरी हुई है। अगस्त में अब तक 25 हजार का आंकड़ा पार कर चुके हैं। वृद्धिदर के मुताबिक, 31 अगस्त तक 28 हजार से अधिक मरीज हो जाएंगे।
इस हिसाब से अक्तूबर में संक्रमित रोगियों की संख्या करीब पांच लाख हो जाएगी। चिकित्सा विशेषज्ञों का तर्क है कि जितने मरीज जांच के दौरान पकड़ में आ रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा बिना लक्षण वाले भी हो सकते हैं। ऐसे में कुछ इलाकों में हर्ड इम्युनिटी विकसित हो जाएगी।
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस के आक्रमण का पीक होने का मतलब होता है कि नए मामलों में स्थिरता आ जाए।
राजधानी के आंकड़ों को देखें तो करीब 15 दिन से मरीजों की संख्या का ग्राफ 600 से 700 के बीच बना हुआ है। अनुमान है कि दो माह तक यही स्थिति रहेगी और फिर अक्तूबर के बाद गिरावट आने लगेगी।
यह भी कहा जाता है कि जब रोजाना मिलने वाले नए मामलों की संख्या पिछले दिनों के बराबर या उससे कम होने लगे तो भी वायरस की स्थिति पीक पर है।
गंभीर मरीजों को रहना होगा ज्यादा सतर्क
पीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. टीएन टोल बताते हैं कि बारिश के बाद वायरस का प्रसार कम हो जाता है। ऐसे में इसके बढ़ने की गति भी धीमी पड़ जाएगी। इसके चलते भी अक्तूबर के बाद कोरोना का असर कम होने का अनुमान है। हालांकि, गंभीर मरीजों को कहीं ज्यादा सावधान रहना होगा।
मिल सकते हैं इलाज के कई नए विकल्प
एम्स पटना के पूर्व निदेशक डॉ. जीके सिंह कहते हैं कि अंकगणित के हिसाब से अक्तूबर के बाद तक करीब 20 फीसदी लोगों में प्रत्यक्ष रूप से और इतने ही अप्रत्यक्ष रूप से वायरस पहुंच जाएगा। ऐसे में जहां पॉजिटिव का आंकड़ा इन दिनों ज्यादा आ रहा है, वहां हर्ड इम्युनिटी विकसित हो जाएगी। दूसरी खास बात यह होगी कि कुछ दवा कंपनियों के टीके आ सकते हैं और कुछ के ट्रायल पूरे हो गए हैं। इसका भी फायदा मिलेगा। इसी तरह प्लाज्मा थेरेपी सहित अन्य विकल्पों के परिणाम भी दो माह बाद दिखने लगेंगे।
शहर के ज्यादातर क्षेत्रों में वायरस चरम पर
स्वास्थ्य विभाग के कोरोना नियंत्रण अभियान के नोडल प्रभारी डॉ. केपी त्रिपाठी कहते हैं कि शहरी इलाके के ज्यादातर क्षेत्रों में वायरस चरम पर है। वायरस के ट्रेंड पर गौर करें तो सदर, कैसरबाग सहित जिन इलाकों में अप्रैल और मई में मरीज मिल रहे थे, वहां से अब केस नहीं आ रहे हैं। जुलाई में भी कई इलाकों में अब कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के दौरान मरीजों की संख्या गिरी है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगस्त में जिन इलाके में ज्यादा संक्रमित हैं, वहां अक्तूबर में कमी आएगी।