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दिल के मरीजों को कोरोना दे रहा ज्यादा दर्ज

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दिल के मरीजों को कोरोना दे रहा ज्यादा दर्ज
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अस्पतालों में भर्ती हृदय रोगियों के लिए कोरोना वायरस ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि संस्थान में भर्ती होने वाले हृदय रोगियों को अतिरिक्त दवाएं दी जाती हैं, लेकिन वे बेअसर साबित होती हैं।
राजधानी में लेवल थ्री के अस्पतालों में लोहिया संस्थान में 133, एसजीपीजीआई में 200, केजीएमयू में 216 बेड हैं। हर संस्थान में 30 से 40 आईसीयू बेड हैं। यहां हृदय रोगियों को अतिरिक्त दवाएं देनी पड़ती हैं।
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60 से अधिक उम्र वाले कोरोना संक्रमित दिल के मरीजों की मौतों का आंकड़ा भी ज्यादा है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि दिल के मरीजों में यदि पेसमेकर लगा है या अन्य सर्जरी हुई है तो उनमें वायरस को नियंत्रित कर पाना नामुमकिन हो जाता है।
इसी तरह दिल की मांसपेशियों में फैलाव या फिर जिनकी धमनियों में ब्लॉकेज होता है, उनमें भी समस्या बढ़ जाती है। फेफड़ों में पानी भरने से खून का जमाव बढ़ जाता है। कुछ मरीजों में खून में प्रोटीन का स्तर भी बढ़ा हुआ पाया गया है।
ब्लॉक हो जाती हैं मांसपेशियां
केजीएमयू के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. गौरव चौधरी का कहना है कि सामान्य व्यक्ति के हृदय की गति न्यूनतम 60 और अधिकतम 100 बीट प्रति मिनट होती है, लेकिन कोरोना की चपेट में आने वालों में यह 30 से 50 के बीच आ जाती है। इसी तरह कोरोना वायरस दिल की मांसपेशियों की सूजन बढ़ा देता है, जिससे मांसपेशियां ब्लॉक हो जाती हैं। ऐसे में इन मरीजों को पल्मोनरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम के साथ ही कार्डियो अरेस्ट की समस्या हो जाती है और जान चली जाती है।
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दिल की पंपिंग क्षमता पर पड़ता है असर
एसजीपीजीआई के रेजिडेंट डॉ. और कोरोना वार्ड में मरीजों के इलाज में जुटे डॉ. उमेश त्रिपाठी बताते हैं कि वह कोविड वार्ड में दूसरी बार ड्यूटी कर रहे हैं। इस दौरान दिल के कई मरीजों का मूल्यांकन किया तो पाया कि संक्रमण से निकलने वाले केमिकल मेडिएटर हृदय की मांसपेशियों में सूजन पैदा कर देते हैं। इससे हृदय की पंपिंग क्षमता पर असर पड़ता है। ऐसे में अन्य मरीजों की अपेक्षा हृदय रोगियों को रक्त पतला करने की दवा हेपरिन और स्टेराइड की खुराक ज्यादा देनी पड़ती है। हाईड्रोसाइक्लोरोक्वीन देने के बाद मरीज की ईसीजी पर ध्यान रखना होता है।
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