महाराष्ट्र में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बावजूद इसके मुंबई से लखनऊ आने वाली ट्रेनों के यात्रियों की स्टेशन पर कोई जांच नहीं की जा रही है।
इतना ही नहीं ये यात्री सोशल डिस्टेंसिंग तक का पालन नहीं कर रहे है, जिससे राजधानी में संक्रमण फैलने की आशंका बनी है।
शनिवार सुबह 8.40 बजे मुंबई से पुष्पक एक्सप्रेस लखनऊ जंक्शन पहुंची तो प्लेटफॉर्म नंबर छह पर यात्रियों का हुजूम उमड़ पड़ा। बोगियों में भूसे से भरे यात्री एक साथ प्लेटफॉर्म पर आ गए।
इस दौरान न तो जीआरपी और न ही आरपीएफ का एक सिपाही मौके पर था, जो इनसे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाता।
वहीं, बाहर सरकुलेटिंग एरिया तक भीड़ के रूप में निकले इन यात्रियों की जांच, सैनिटाइजेशन या थर्मल स्कैनिंग की कोई व्यवस्था रेलवे प्रशासन ने नहीं की थी।
पुष्पक की ही तरह गोरखपुर एलटीटी एक्सप्रेस, अवध एक्सप्रेस, कुशीनगर सहित महाराष्ट्र से लखनऊ आने वाली दूसरी ट्रेनों के यात्री भी इसी तरह बिना किसी जांच के शहर आ रहे हैं।
वहीं, अलीगंज निवासी युवक अपनी कार से दिल्ली से आगरा एक्सप्रेस-वे होते हुए लखनऊ आया। इस दौरान टोल पर उसकी जांच तक नहीं हुई। तीन दिन ठहरने के बाद वह इसी मार्ग से लौट गया।
उधर, त्रिवेणी नगर का छात्र मुंबई से बीटेक कर रहा है। चार दिन पहले वह ट्रेन से चारबाग स्टेशन उतरा। यहां उसकी जांच तक नहीं की गई। निगरानी समिति ने छात्र की कोई जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी।
पांच राज्यों में कोरोना के केस बढ़ने के बाद राजधानी में स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता बताने के लिए ये मामले काफी हैं।
इनसे विभाग का टोल प्लाजा, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट पर संक्रमित इलाकों से आने वालों की निगरानी व जांच करने का दावा खोखला साबित हो रहा है।
हकीकत यह है कि बिना जांच व स्क्रीनिंग के लोग राजधानी पहुंच रहे हैं। गैर राज्यों से आने वालों की निगरानी के लिए बनी मोहल्ला समिति भी फेल हो रही हैै। इनके पास भी कोई जानकारी नहीं पहुंच पा रहीा है।
ऐसे में संक्रमित राज्यों से आकर यहां समुदाय में मिलने के बाद लोग लौट भी जा रहे हैं। हालांकि, जिला कांटेक्ट ट्रेसिंग प्रभारी डॉ. एमके सिंह के मुताबिक, संक्रमित राज्यों से आने वाले सभी लोगों की जांच कराई जा रही है। सभी को सर्विलांस पर रखा जा रहा है।
पहले थी यह व्यवस्था
यात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल ने बताया कि पहले लखनऊ जंक्शन व चारबाग स्टेशन की व्यवस्था बेहद पुख्ता थी। मुंबई से आने वाली ट्रेनों की बोगियों को एक-एक कर खोला जाता था। यात्रियों को कतार में खड़ा कर नंबर से बाहर निकाला जाता था। इस दौरान इनकी थर्मल स्कैनिंग होती थी और हाथों को सैनिटाइज भी करवाया जाता था। हालांकि, अब यह सब बंद है।
आटो-टैंपो में भी बढ़ा खतरा
स्टेशन से निकलने वाले ज्यादातर यात्री आटो, टैंपो से घर पहुंचते हैं। ऐसे में इनमें साथ में सफर करने वाले दूसरे लोगों के भी संक्रमित होने का खतरा है। इसका कारण है कि ऑटो, टैंपोवाले फिर से तय क्षमता से अधिक यात्री बैठा रहे हैं। इससे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा। यही स्थिति स्टेशन के बाहर खड़ी होने वाली बसों में होती है। मुंबई से आने वालों की जांच न होने से बसों के अन्य यात्री भी संक्रमित हो सकते हैं।
सभी यात्रियों की जांच संभव नहीं
सीएमओ डॉ. संजय भटनागर ने बताया कि रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट व आगरा एक्सप्रेस-वे से आने वाले सभी यात्रियों की जांच संभव नहीं है। ऐसे में सिर्फ उनकी जांच कराई जाती है जिनमें कोई लक्षण दिखे। गैर राज्य से आने वालों की निगरानी के लिए मोहल्ला समिति को लगाया गया है। इनके जरिये भी सूचना भेजी जा रही है।
एयरपोर्ट पर भी नहीं बरती जा रही सावधानी
रेलवे स्टेशन, टोल प्लाजा की ही तरह चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के घरेलू टर्मिनल पर मुंबई सहित अन्य राज्यों से आने वालों की कोई जांच नहीं हो रही है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल पर जांच हो रही है। एयरपोर्ट पर अराइवल हॉल में एंट्री से पहले स्क्रीनिंग तो हो रही है, यात्रियों की जांच नहीं की जा रही है। ऐसे में यात्री सीधे बाहर निकल जाते हैं। यहां कोई भी टीम स्क्रीनिंग नहीं कर रही है। अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल पर विदेश से आने वालों का कोविड टेस्ट किया जा रहा है।