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यूपीः प्लाज्मा थेरेपी के बाद भी नहीं बच पाई केजीएमयू में भर्ती डॉक्टर की जान, 15 दिन रहे थे वेंटिलेटर पर

Sat, 09 May 2020 08:37 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
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केजीएमयू में भर्ती उरई निवासी डॉक्टर 15 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद जिंदगी की जंग हार गए। सुबह डॉक्टर और उनकी पत्नी की रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी लेकिन शाम करीब 4 बजे उनकी मौत हो गई। प्रदेश में पहली बार डॉक्टर को प्लाज्मा थेरेपी दी गई थी लेकिन उनकी जान नहीं बच पाई। 

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उरई निवासी डॉ. सुनील कुमार अग्रवाल (58) सरकारी अस्पताल में बतौर एनस्थीसिया विशेषज्ञ के रूप में तैनात थे। केजीएमयू के 1981 बैच के डॉक्टर की ड्यूटी उरई मेडिकल कॉलेज में लगाई गई थी। इसी दौरान उनकी हालत बिगड़ गई। 25 अप्रैल को पत्नी और बेटी उन्हें लेकर केजीएमयू पहुंचे। डॉक्टर का बेटा भी केजीएमयू से ही एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा। 

जांच के दौरान डॉक्टर और उनकी पत्नी की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई। जबकि बेटा और बेटी की रिपोर्ट निगेटिव आई। पति-पत्नी को भर्ती कर लिया गया और बेटा-बेटी को क्वारंटीन में भेज दिया। डॉक्टर की पत्नी की हालत ठीक रही लेकिन डॉक्टर को सांस लेने में तकलीफ बढ़ती गई। वह ब्लड प्रेशर और शुगर से भी पीड़ित थे। ऐसे में प्लाज्मा थेरेपी के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। ऑक्सीजन की मात्रा भी कम कर दी गई थी। शुक्रवार को उनकी और उनकी पत्नी की  जांच रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी। शनिवार को दूसरी जांच रिपोर्ट भी निगेटिव आई। लेकिन दोपहर बाद करीब 4 बजे उनकी मौत हो गई।
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पहली बार की गई थी प्लाज्मा थेरेपी
प्रदेश में पहली बार 26 अप्रैल को डॉक्टर की प्लाज्मा थेरेपी की गई। पहली खुराक के रूप में 200 एम एल दिया गया। अगले दिन दूसरी खुराक के रूप में फिर देर शाम 200 एम एम प्लाज्मा दिया गया। प्लाजमा थेरेपी के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ था। 

यूटीआई और किडनी फेल्योर से गई जान
संक्रामक रोग यूनिट के प्रभारी डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि डॉक्टर को बचाने के लिए लगातार प्रयास किया गया। प्लाजमा थेरेपी के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ था। फेफड़े का संक्रमण कम हो गया था। वेंटीलेटर पर ऑक्सीजन का लेबल भी सही स्थिति में हो गया था। उन्हें डायबिटिक की भी समस्या थी। हालांकि भर्ती होने के बाद उनका डायबिटिक लेवल और ब्लड प्रेशर नियंत्रित हो गया था। इसी बीच उन्हें यूरिन ट्रैक्ट इंफेक्शन हुआ। जांच के बाद संबंधित कीटाणु रोधी दवाएं दी गईं। उनकी डायलिसिस भी की गई। इस दौरान उनकी किडनी ने रिस्पांस देना बंद कर दिया। तमाम प्रयास के बाद भी डॉक्टर को बचाया नहीं जा सका। 

क्या कहते हैं जिम्मेदार
डॉक्टर और उनकी पत्नी कि दोनों रिपोर्ट निगेटिव आ गई थी। पत्नी को डिस्चार्ज करने की तैयारी थी। डॉक्टर को इलाज के लिए दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया जाना था। लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। प्लाज्मा थेरेपी देने के बाद फेंफड़ों में बहुत सुधार आया था। वेंटीलेटर की आवश्यकता भी कम हो गयी थी। 
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डॉक्टर सुधीर सिंह मीडिया प्रभारी केजीएमयू

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