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विद्युत शवदाह गृहों पर लगीं कतारें, नहीं हो पा रहे अंतिम संस्कार

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राजधानी में संक्रमण तेज होने से जितनी मौतें एक दिन में हो रही हैं, उतने अंतिम संस्कार विद्युत शवदाह गृहों पर नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में शुक्रवार शाम से लकड़ी से शवों को जलाना शुरू कर दिया गया है।
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इसके लिए बैकुंठधाम में विद्युत शवदाह गृह के पीछे बने दस स्थलों को घेर कर बैरीकेडिंग कर दी गई है।
शहर के विद्युत शवदाह गृहों बैकुंठधाम और गुलाल घाट पर शाम छह बजे तक 40 शव पहुंचे थे।
एक अंतिम संस्कार में कुल डेढ़ घंटा लगता है। इसमें 45 मिनट शव जलने के लिए और इतना की वक्त सैनिटाइजेनशन व अन्य तैयारी के लिए। ऐसे में लकड़ी से शवों को जलाना शुरू कर दिया गया है।
दूसरे दिन ही खराब हुई तीस साल पुरानी मशीन
बैकुंठधाम पर दो और गुलाल घाट पर एक मशीन है। बैकुंठधाम पर दो दिन पहले तक एक ही मशीन चल रही थी। बृहस्पतिवार शाम से दूसरी मशीन चली, पर वह लोड के कारण शुक्रवार सुबह चार अंतिम संस्कार के बाद खराब हो गई। इसे शाम को ठीक किया जा सका। बताया जा रहा है कि ये मशीन करीब तीस साल पुरानी है।
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तीन दिन से बांटे जा रहे टोकन
अंतिम संस्कार जल्द कराने के लिए नगर निगम कर्मचारियों से लेकर अफसरों तक दबाव बनाया जाता है। सिफारिश के चक्कर में कई बार पहले से इंतजार कर रहे लोग हंगामा भी कर चुके हैं। अब तीन दिनों से अंतिम संस्कार के लिए टोकन भी दिए जा रहे हैं।
लकड़ी से अंतिम संस्कार किया जाएगा
नगर आयुक्त अजय द्विवेदी ने बताया कि बैकुंठधाम पर विद्युत शवदाह गृह के पीछे बने स्थलों पर लकड़ी से अंतिम संस्कार किया जाएगा। बैरीकेडिंग करा दी गई है। लकड़ी से अंतिम संस्कार में कम वक्त लगेगा। संक्रमित का अंतिम संस्कार विद्युत शवदाहगृह में ही होगा ऐसा नहीं है, क्योंकि दूसरे शहरों में जहां विद्युत शवदाह गृह नही हैं, वहां लकड़ी से अंतिम संस्कार किया जा रहा है।
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