इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सपा शासनकाल के दौरान हुए कोऑपरेटिव बैंक भर्ती घोटाला मामले के अभियुक्त यूपी कोऑपरेटिव बैंक लि. के तत्कालीन एमडी हीरालाल यादव को कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं कहा जा सकता कि याची के खिलाफ पहली नजर में मामला नहीं बनता है। न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति विकास कुंवर श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह फैसला हीरालाल यादव की याचिका को खारिज करते हुए सुनाया।
याची ने भर्ती घोटाला मामले में एसआईटी थाने में आईपीसी के तहत जालसाजी, आपराधिक साजिश रचने व फर्जीवाड़ा करने के आरोपों में 27 अक्तूबर 2020 को दर्ज एफआईआर को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि प्रश्नगत चयन व भर्ती प्रक्रिया यूपी कोऑपरेटिव बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के प्रस्ताव के तहत हुई थी।
उधर, सरकारी वकील ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि एसआईटी ने जांच में पाया है कि याची ने एमडी रहते हुए 10 पदों की शैक्षिक योग्यता में नियम के विपरीत जाकर बदलाव कर दिया। कोर्ट ने पक्षों की बहस सुनने के बाद फैसले में कहा कि इसमें मामले में विवेचना के लिए पर्याप्त आधार है। लिहाजा प्राथमिकी को रद्द करना तर्कसंगत नहीं है। कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ याचिका को खारिज कर दिया।