दीक्षांत समारोह में राज्यपाल राम नाईक व मेडल पाने वाले छात्र
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कोलोनियल गाउन और हैट की जगह छात्रों ने जहां काली पैंट और सफेद शर्ट पहनी हुई थी तो छात्राएं सफेद सूट में फब रही थीं। सभी के गले में विशेष पटके थे जिन पर विश्वविद्यालय का नाम और लोगो लगा था। मंच पर आसीन अतिथियों के सिर पर सिल्क का साफा सज रहा था। हर चेहरे पर सफलता की चमक नजर आ रही थी।
मौका था डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह का। इस अवसर पर सत्र 2014-15 के 50 छात्र-छात्राओं को कुल 67 मेडल दिए गए, जिनमें से 44 पर छात्राओं ने कब्जा किया जबकि 23 छात्रों के नाम रहे।
विश्वविद्यालय का सर्वश्रेष्ठ कुलाध्यक्ष स्वर्ण पदक एमबीए की छात्रा मुक्ता यादव को मिला तो कुलाध्यक्ष कांस्य सहित सर्वाधिक चार पदक बीएड एमआर की छात्रा जया सिंह को दिए गए। समारोह में कुल 241 छात्र-छात्राओं को उपाधि दी गई।
इस अवसर पर राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि दिव्यांगों को पढ़ाना शिक्षकों के लिए चुनौती के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने खुशी जताई कि पुनर्वास विवि के दीक्षांत के साथ प्रदेश में सभी विवि में दीक्षांत संपन्न हो गए।
मेहनत करें वरना पड़ेगी आरक्षण की जरूरत
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सबसे खास यह रहा कि इस समारोह के साथ ही प्रदेश से पूरी तरह अंग्रेजों के दिए गाउन और हैट की विदाई करने के साथ भारतीय संस्कृति के परिधानों को शामिल कर लिया गया।
अन्य की तरह यहां भी सर्वाधिक मेडल पर छात्राओं का कब्जा देखकर राम नाईक ने एक बार फिर छात्रों को चेताया कि वह मेहनत करें वरना एक दिन उन्हें आरक्षण की जरूरत पड़ने लगेगी।
समारोह में इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश एसएन शुक्ला, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसबी निमसे, विकलांगजन विकास विभाग के सचिव अनिल कुमार सागर, एकेटीयू कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक आदि उपस्थित रहे।
अब यूपी के विवि में नहीं होती नकल
राज्यपाल ने कहा कि देशभर में उत्तर प्रदेश और बिहार दो बातों से बदनाम हैं। एक यहां पढ़ाई नहीं होती दूसरा परीक्षा में नकल होना। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब यूपी के विश्वविद्यालयों में परीक्षा से नकल बाहर हो रही है।
उन्होंने कहा कि इस साल भी सभी जगह सख्ती के साथ परीक्षाएं हुई हैं। जो थोड़ी बहुत कमी बची भी है उसे दूर किया जाएगा। अब पढ़ाई की स्थिति भी पहले से बेहतर हो रही है।
एक साथ ही दें सारे मेडल
दीक्षांत में कई स्टूडेंट्स ऐसे भी थे जिन्हें एक से अधिक मेडल मिले। अपने भाषण के दौरान राज्यपाल ने सलाह दी कि समारोह में ऐसी व्यवस्था करें कि यदि किसी स्टूडेंट को एक से अधिक मेडल मिले तो एक साथ ही दे दें। उसे बार-बार मंच पर न बुलाया जाए। इससे समारोह में समय कम लगेगा।
राज्यपाल ने कुलपति प्रो. निशीथ राय को यह भी निर्देश दिए कि वह सभी औपचारिकताएं पूरी करके एक माह के अंदर विवि के नव-निर्मित प्रेक्षागृह का नामकरण करें। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि 12 दिन में तो नवजात का भी नामकरण हो जाता है, फिर इस प्रेक्षागृह को महीनों से नाम क्यों नहीं दिया गया।
मेडल बदलने के मामले में होगी जांच
विवि के दीक्षांत समारोह के दो दिन पहले एमए इंग्लिश में सर्वाधिक अंक पाने वाले छात्र प्रांशुल गौतम ने राजभवन में शिकायत की थी कि विवि द्वारा पूर्व में जारी मेडल सूची में उसका नाम शामिल था।
21 मई को उसे विवि की ओर से उसे पत्र भेजकर आमंत्रित किया गया। मगर, इसके बाद अचानक मेडल सूची बदली और उसका नाम हटा दिया गया।
राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी। यदि छात्र अपनी जगह सही पाया जाता है तो गलती सुधारी जाएगी।