फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दीक्षांत समारोह: मुख्य अतिथि बोले- शिक्षकों के सामने नारेबाजी करने वाले छात्र कभी सुखी नहीं रह सकते

Tue, 08 Nov 2022 04:01 PM IST
ishwar ashish माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ

सार

डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विवि के दीक्षांत समारोह सम्पन्न हो गया। जिसमें 119 मेधावियों को 150 मेडल व 1506 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने भी संबोधित किया।
विज्ञापन
दीक्षांत समारोह का एक दृश्य। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पद्मभूषण व काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष आचार्य वशिष्ठ त्रिपाठी ने विद्यार्थियों से कहा है कि वे परिश्रम से ज्ञान प्राप्त करें और इसका प्रयोग समाज के हित में करें। उन्होंने कहा कि कुछ छात्र जिन शिक्षकों से ज्ञान प्राप्त करते हैं, उनके सामने ही नारेबाजी, विरोध-प्रदर्शन करते हैं किंतु ऐसे छात्र सुखी नहीं रहते हैं। शिक्षकों के सामने विनम्र रहें और श्रद्धापूर्वक अपनी पढ़ाई पूरी करें। वे डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। दीक्षांत समारोह में 119 मेधावियों को 150 मेडल व 1506 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई।

विज्ञापन


आचार्य वशिष्ठ ने कहा कि श्रद्धा से पढ़ाई ही नहीं श्रद्धा से धन भी अर्जित करना चाहिए तभी समृद्धि संभव है क्योंकि अधर्म (गलत तरीके) से प्राप्त धन सुख का साधन नहीं बनता है। विद्यार्थी देश के कल्याण के लिए काम करें। उन्होंने शिक्षकों-अधिकारियों को भी सीख देते हुए कहा कि राग, द्वेष और मोह से दूर रहें। अत्यधिक आसक्ति किसी के लिए भी घातक हो सकती है।

आचार्य वशिष्ठ ने विद्यार्थियों को सुझाव दिया कि वे निद्रा, आलस्य, तंद्रा, भय, क्रोध और दीर्घसूत्रता से दूर रहें तभी सफल हो सकते हैं। मंच पर दिव्यांगजन सशक्तीकरण मंत्री नरेंद्र कश्यप, कुलपति प्रो. आरकेपी सिंह, रजिस्ट्रार रोहित सिंह, परीक्षा नियंत्रक डॉ. अमित कुमार राय आदि उपस्थित थे।
विज्ञापन


माता-पिता को कभी न भूले युवा: राज्यपाल
दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कर रहीं राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने कहा है कि युवा कभी भी अपने माता-पिता को न भूलें। जिन्होंने आपको पालने में बड़ी कठिनाई उठाई। अपनी तकलीफ को भूलकर भी आपको पढ़ाया। किंतु आप विदेश और दूसरे प्रदेश कमाई के लिए चले जाते हैं और अपने माता-पिता को भूल जाते हैं। इसके बाद भी माता-पिता कभी आपकी बुराई नहीं करते हैं किंतु ऐसे समय में उनको सहारे की सहयोग की जरूरत होती है।

राज्यपाल ने कहा कि आप यह न भूलें कि एक दिन आप भी बुजुर्ग होंगे और आपको भी सहयोग की जरूरत होगी। जैसा बीच बोएंगे, वैसा फल आप भी पाएंगे। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य दूसरों की मदद करना है। दिव्यांगों की सेवा कर आप उपकार नहीं कर रहे बल्कि कर्तव्य निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अभी भी मानसिक विकलांगता, बौद्धिक विकलांगता व आटिज्म से पीड़ित काफी लोग मुख्यधारा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। विश्वविद्यालय इस पर शोध करें। नए कोर्स शुरू करें। ऐसे प्रोफेशनल तैयार करें जो इनको मुख्य धारा में शामिल कर सकें।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें