आरोपी को भगाने में दो प्रोफेसर का हाथ
अर्पणा यादव ने आरोप लगाया कि आरोपी डॉ. रमीज मलिक को भगाने में प्रो. वाहिद अली और प्रो. सुरेश बाबू का हाथ है। मामला सामने आने के बाद दस दिन तक दोनों की आरोपी से हुई बात। उन्होंने सवाल किया कि आखिर क्यों इन दोनों के खिलाफ केजीएमयू की ओर से कोई जांच नहीं की गई। वहीं, आरोपी भागने से पहले दो लाख रुपये अपने घर से लिए थे। इसके पीछे अंदर के लोगों का हाथ है।
विशाखा कमेटी के सदस्याओं को बताया अपराधी
प्रेसवार्ता में उन्होंने विशाखा कमेटी के सदस्य फीजियोलॉजी के प्रोफेसर और एक अन्य सदस्य को छेड़छाड़ का दोषी बताया। कहा कि दोषियों को कमेटी में शामिल किया गया है। साथ ही कहा कि कमेटी की जांच रिपोर्ट हमेशा संदिग्ध क्यों आती है। इस पर भी जांच होनी चाहिए।
सुनवाई में नहीं पहुंची पीड़िता
अपर्णा यादव ने बताया कि पीड़िता इतनी डरी हुई है कि वह शुक्रवार सुनवाई में शामिल होने के लिए आयोग नहीं पहुंची। फोन के जरिये उसकी सुनवाई की गई। उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। दबाव बनाया जा रहा है।
मामले को दबाने के लिए केजीएमयू ने पीड़िता को सबसे दूर रखने में लगा है। यह केजीएमयू का पहला ममला नहीं है वहां ही ही यौन उत्पीड़न की शिकार प्रोफेसर की शुक्रवार को आयोग में सुनवाई की गई। मामले की जांच की जा रही है ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके।