लखनऊ। केजीएमयू के दंत संकाय के नए भवन निर्माण को लेकर विवाद बढ़ गया है। शिक्षकों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि दंत संकाय के लिए प्रस्तावित भूखंड के आकार में कटौती की गई है। इस मामले में मुख्यमंत्री और राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री को पत्र और राज्यपाल को ईमेल भेजा है, जिसमें लिखा गया है कि पहले साढ़े तीन एकड़ भूमि में भवन निर्माण की योजना थी। अब उपलब्ध क्षेत्रफल कम कर दिया गया है। इससे दंत संकाय दो भागों में बंट जाएगा। यह मरीजों और डॉक्टरों के लिए परेशानी का कारण बनेगा। भविष्य में शिक्षण, शोध और सुविधाओं पर भी बुरा असर पड़ेगा। शिक्षकों ने मांग की है कि सभी शैक्षणिक, क्लीनिकल और प्रशासनिक इकाइयां एक ही भवन में हों। उनका मानना है कि अलग-अलग स्थानों पर संचालन से छात्रों, शिक्षकों और मरीजों को परेशानी होती है। एकीकृत भवन से शिक्षण, शोध और सेवाओं की गुणवत्ता सुधरेगी। फैकल्टी सदस्यों ने पूर्व में आवंटित भूमि पर ही आधुनिक बहुमंजिला भवन बनाने की मांग की है।