लखनऊ। ऊर्जा महकमे में भ्रष्टाचार और बिजली चोरी पर अंकुश लग जाए तो इसके निजीकरण की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए महकमे के प्रबंधन को ऐसी कठोर कार्रवाई करनी चाहिए, जिससे कार्मिक भ्रष्टाचार करने से डरें। ये विचार भारतीय मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष मिथिलेश शुक्ला ने व्यक्त किए।
वह सोमवार को गांधी भवन सभागार में विद्युत परिषद आशुलेखक संघ के महाधिवेशन को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार व बिजली चोरी रोककर महकमे को घाटे से उबारा जा सकता है। उन्होंने सरकार व प्रबंधन से अपील की कि ऊर्जा निगमों के प्रस्तावित निजीकरण को तत्काल रोका जाए। महाधिवेशन को संगठन के पदाधिकारी अखिलानंद सिंह, शिवजी तिवारी, रामनाथ यादव, मीना रानी शर्मा, जेसी कलानी, राजेश चंद, नरेंद्र कुमार मिश्र आदि ने भी संबोधित किया।
वेतनमान नहीं मिला तो 14 से अनशन
संघ के केंद्रीय अध्यक्ष वीके सिंह कलहंस ने मांग की कि वर्ष 1970 का रेगुलेशन तत्काल लागू कर सभी आशुलेखकों को उनकी नियुक्ति की तारीख से 1350-2160 का वेतनमान दिया जाए। 13 अप्रैल तक आशुलेखकों वेतनमान नहीं मिला और ग्रेड-3 आशुलेखकों की भर्ती समाप्त नहीं की गई तो 14 अप्रैल से शक्ति भवन के मुख्य द्वार पर अनशन शुरू करेंगे।
कार्यक्रम में पहुंचे लोग।