प्रो. अमित केशरी।
लखनऊ। अगर आपको कान में लगातार सीटी सुनाई देती है तो यह सुनने की नहीं, बल्कि दिमागी समस्या है। उम्र के अनुसार इस बीमारी के असर भी अलग-अलग हैं। इसलिए बीमारी का इलाज भी उम्र के अनुसार करना चाहिए। संजय गांधी पीजीआई और सेंटर फॉर बायोमेडिकल रिसर्च (सीबीएमआर)के अध्ययन में ये निष्कर्ष सामने आए हैं।
यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय पत्रिका हियरिंग रिसर्च में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में 120 प्रतिभागी शामिल किए गए। इनमें 60 स्वस्थ और 60 लगातार कान में सीटी बजने वाली आवाज (टिन्निटस) के मरीज थे। मैग्नेटिक फंक्शनल रेजोनेंस इमेजिंग (एफएमआरआई) और डिफ्यूजन टेंसर इमेजिंग (डीटीआई) तकनीकों की मदद से इनकी मस्तिष्क की गतिविधियों का अध्ययन किया गया।
इसमें पाया गया कि टिन्निटस अलग-अलग उम्र में मस्तिष्क पर अलग असर डालता है। इसलिए उपचार की विधियां बदलने की जरूरत है। यह शोध एसजीपीजीआई के हेड एंड नेक विभाग के प्रमुख प्रो. अमित केशरी और सीबीएमआर के डॉ. उत्तम कुमार ने किया है।
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युवाओं में ध्यान और नियंत्रण वाले हिस्से कमजोर
प्रो. अमित केशरी और सीबीएमआर के डॉ. उत्तम कुमार ने बताया कि अध्ययन में पाया गया कि टिन्निटस पीड़ित युवाओं (19–35 वर्ष) में सामान्य के मुकाबले श्रवण और भावनात्मक क्षेत्र अधिक सक्रिय पाए गए। वहीं, ध्यान और नियंत्रण वाले हिस्से कमजोर रहे। इस वजह से उन्हें कान में लगातार आने वाली आवाज ज्यादा परेशान करती है और मानसिक तनाव बढ़ता है।
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बुजुर्गों में स्मृति और ध्यान की समस्या
डॉ. उत्तम कुमार ने बताया कि अध्ययन में देखा गया कि बीमारी वाले वर्ग (45–65 वर्ष) में स्मृति और ध्यान क्षमता घटने से थकान और एकाग्रता की समस्या अधिक रही। हालांकि, उनके मस्तिष्क ने अतिरिक्त हिस्सों को सक्रिय कर आवाज सुनने की समस्या की भरपाई करने की कोशिश की।
प्रो. अमित केशरी।