उत्तर प्रदेश के युवाओं में तंबाकू का सेवन बढ़ा है। वे खैनी, गुटखा और पान मसाला के रूप में तंबाकू ले रहे हैं। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (जीएटीएस) की 2016-17 की रिपोर्ट में ये तथ्य सामने आए हैं। स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और राज्य मंत्री महेंद्र सिंह ने बृहस्पतिवार को लखनऊ में एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में यह रिपोर्ट जारी की।
केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन, सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) तथा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज मुंबई की तकनीकी सहायता से यह सर्वे किया है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की कंसल्टेंट डॉ. सुलभा परशुरामन ने बताया कि 2009-10 के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 33.9 फीसदी युवा तंबाकू का सेवन करते थे। अब यह संख्या बढ़कर 35.5 फीसदी हो गई है। यानी हर तीन में से एक युवा तंबाकू का सेवन करता है।
हां, सिगरेट या बीड़ी (धूम्रपान) के प्रतिशत में जरूर कमी आई है, लेकिन इसके अनुपात में खैनी, तंबाकू और पान मसाला का सेवन 25.3 फीसदी से बढ़कर 29.4 फीसदी हो गया है।
सर्वे के अनुसार 15.9 फीसदी वयस्क खैनी का प्रयोग करते हैं। 11.5 फीसदी गुटखा खाते हैं, जबकि 11.3 फीसदी वयस्क बीड़ी पीते हैं। तंबाकू सेवन शुरू करने की औसत आयु में जरूर बढ़ोतरी हुई है। जीएटीएस-1 में औसत आयु 18 साल थी तो जीएटीएस-2 तंबाकू सेवन की औसत आयु 18.7 वर्ष है। वहीं, 15 से 17 साल के युवाओं में तंबाकू सेवन में दो फीसदी की कमी पाई गई है।
धूम्रपान न करने वाले भी चपेट में
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सर्वे में धूम्रपान न करने वालों के भी धुएं की चपेट में आने का खुलासा हुआ है। खास तौर से कार्यस्थल पर दूसरों के धूम्रपान के दौरान संपर्क में आने के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है। 2009-10 में जहां मात्र 28.9 फीसदी लोग अप्रत्यक्ष धूम्रपान की चपेट में आ रहे थे, वहीं 2016 में यह संख्या 35.7 फीसदी हो गई है। किसी भी सार्वजनिक स्थल पर ऐसे धुएं के संपर्क में आने वालों की संख्या बढ़कर 35.5 फीसदी हो गई है, जबकि पहले यह 29.1 फीसदी थी।
छोड़ना भी चाहते हैं तंबाकू का उपयोग
डॉ. सुलभा ने बताया कि 56.4 फीसदी धूम्रपान करने वाले और 52.3 फीसदी खैनी खाने वाले तंबाकू का उपयोग छोड़ना चाहते हैं। इनमें से 36.5 फीसदी धूम्रपान करने और 25.5 फीसदी खैनी खाने वालों को इसे छोड़ने की सलाह दी गई है।
उन्होंने बताया कि लोगों में तंबाकू से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी बढ़ी है। डिब्बे पर चेतावनी और मीडिया से प्रसारित सूचना से यह संभव हुआ है। पैक पर बड़ी चेतावनी जो डिब्बे पर 85 फीसदी आकार में बनी होती है, उसका भी अच्छा असर हुआ है।
क्या है जीएटीएस-2
डॉ. सुलभा ने बताया कि ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (जीएटीएस) एक अंतरराष्ट्रीय मानक है जो वयस्कों द्वारा तंबाकू के उपयोग की व्यवस्थित निगरानी और तंबाकू नियंत्रण के प्रमुख संकेतकों को ट्रैक करता है। यह 15 साल और इससे ऊपर के लोगों का घरेलू सर्वेक्षण है, जो भारत के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया जाता है।
पहला जीएटीएस 2009-10 में हुआ था, जबकि दूसरा 2016-17 में। देश भर में इस सर्वे में अगस्त 2016 से फरवरी 2017 के बीच 74,037 लोगों से बात की गई। उत्तर प्रदेश में कुल 1685 पुरुषों अैर 1779 महिलाओं से अगस्त से सितंबर के बीच बात की गई।
स्वास्थ्य मंत्री को नहीं पता कोटपा कानून
जीएटीएस-2 सर्वे रिपोर्ट जारी करने के दौरान स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि सरकार तंबाकू व इसके उत्पादों पर अंकुश लगाने के लिए प्रतिबद्ध है। बच्चे घर पर तंबाकू लेने से परहेज करते हैं। इसके लिए उन्हें स्कूल के आस-पास जाना होता है। इसलिए ऐसी नीति लानी होगी जिससे स्कूल व खेल के मैदानों के आसपास की दुकानों में तंबाकू बिक्री पर प्रतिबंध लग सके, जबकि कोटपा कानून के तहत यह व्यवस्था पहले से ही लागू है।
राज्य तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के अधिकारियों ने भी मंत्री को इसकी जानकारी नहीं दी। स्वास्थ्य मंत्री ने भविष्य में होने वाले कार्यक्रमों में बेसिक शिक्षा व खेल विभाग के मंत्रियों-अधिकारियों को बुलाने की सलाह दी। इस मौके पर महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. पद्माकर सिंह, केजीएमयू के डॉ. सूर्यकांत, डॉ. एचएस दानू भी मौजूद थे।