पेट दर्द की शिकायत लेकर आलमबाग निजी अस्पताल अवध हॉस्पिटल एवं हार्ट सेंटर में भर्ती हुए मरीज को कैंसर बता दिया गया। इससे सकते में आया मरीज और उसका परिवार 15 दिन तक मुंबई में भटकते रहे। वहां से जब कैंसर न होने की पुष्टि हुई तो परिवार की जान में जान आई।
अब जिला उपभोक्ता फोरम ने निजी अस्पताल को मरीज को हर्जाना देने का आदेश दिया है। शिकायतकर्ता विजय कुमार लाल ने फोरम को बताया कि एक दिसंबर 2014 को ऑफिस से लौटते समय उसे पेट के निचले भाग में दर्द हुआ। अवध हॉस्पिटल में दिखाया तो उसे भर्ती कर सात दिन तक इलाज चला।
अल्ट्रासाउंड सहित कई जांच की गईं। इसके बाद बताया गया कि उसे एंट्रोफाइलोरिक ग्रोथ (कोलोन कैंसर) है। इससे पूरा परिवार सकते में आ गया। अस्पताल के सुझाव पर मुंबई जाकर शिकायकर्ता ने टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में जांच कराईं। यहां 13 दिन रुकने के बाद पता चला कि सभी जांचें सामान्य हैं।
इस दौरान अवध अस्पताल की वजह से उसके करीब 60 हजार रुपये खर्च हो गए। विजय का यह भी कहना है कि उसे अस्पताल की गलत रिपोर्ट की वजह से मानसिक कष्ट हुआ। पूरा परिवार परेशान रहा। मामले को लेकर फोरम ने अस्पताल को नोटिस भेजा, लेकिन इसके बाद भी निजी अस्पताल की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
फोरम ने मौजूद तथ्यों के आधार पर माना कि गलत जांच रिपोर्ट सीधे तौर पर सेवा में कमी है। शिकायतकर्ता का परिवार इससे परेशान हुआ। ऐसे में शिकायतकर्ता हर्जाना पाने का अधिकारी है। उधर, अवध अस्पताल के निदेशक डॉ. सुशील गट्टानी का कहना है कि मामले की अभी जानकारी नहीं है। इसके बारे में पता करके बताएंगे।
पूरे खर्च के अलावा 30 हजार रुपये हर्जाना भी
फोरम के अध्यक्ष शिवदान यादव व सदस्य चंचल जैन ने आदेश में कहा कि अवध हॉस्पिटल मरीज के टाटा हॉस्पिटल में जांच और आने-जाने में हुए खर्च को नौ ब्याज के साथ वापस करे। अवध हॉस्पिटल में इलाज के दौरान खर्च को वापस कराने से फोरम ने मना कर दिया। हालांकि, मानसिक कष्ट व विधिक व्यय के लिए अलग से 30 हजार रुपये निजी अस्पताल को देने होंगे।