मनरेगा में हुए घोटाले के मुद्दे पर राज्य व केंद्र सरकार के बीच खींचतान जारी है।
राज्य सरकार जहां पूर्ववर्ती माया सरकार को घेरने के लिए ईओडब्ल्यू से जांच कराना चाहती है, वहीं केंद्र सरकार इसकी सीबीआई जांच की पक्षधर है। सोमवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भी इस बात को रखा।
केंद्र ने राज्य सरकार से पहले भी सीबीआई से जांच कराने के लिए सिफारिश करने के लिए आग्रह किया था, लेकिन राज्य सरकार ने इस पर कोई रुचि नहीं दिखाई।
केंद्र सरकार ने सर्वोच्च अदालत से कहा है कि उत्तर प्रदेश में मनरेगा योजना में व्यापक अनियमितता हुई है और इसकी जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए, जिसकी राज्य सरकार से सिफारिश भी की गई है। वहीं राज्य सरकार ने केंद्र के इस आग्रह पर फिलहाल अदालत को कोई जवाब नहीं दिया है।
वैसे राज्य सरकार ने इस मामले में कुछ दिनों पहले हाईकोर्ट के पुरानी जांच और प्रक्रिया पर असंतोष जता देने के बाद ही पूरे प्रकरण की नए सिरे से जांच कराने का फैसला कर लिया था।
नए सिरे से जांच पर काम शुरू हो चुका है। इसके लिए लगभग 40 बिंदु छांटे गए हैं, जिन पर यह जांच केंद्रित होगी। माना जा रहा है कि इस बार की जांच में पूर्व मंत्रियों के साथ ही बसपा सरकार के कई आला अफसरों की जिम्मेदारी भी तय होगी।
राज्य सरकार ने यह कदम तब उठाया जब आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा अभी तक की गई जांच पर हाईकोर्ट ने असंतोष जता दिया।
प्रदेश के लगभग 17 जिलों में मनरेगा के तहत हुई अनियमितता की जांच के दौरान ईओडब्ल्यू के तत्कालीन एडीजी एएल बनर्जी ने मिर्जापुर जिले की जांच पूरी कर अदालत को इसकी रिपोर्ट दी थी।
अदालत ने इस रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद 26 अप्रैल 2013 को ईओडब्ल्यू के मौजूदा डीजी को निर्देश देते हुए पूर्व में की गई जांच को अपर्याप्त बताया।
अदालत ने अपने निर्देशों में कहा कि एजेंसी सभी जिलों में समान बिंदुओं पर जांच करे और इस बात का ध्यान रखा जाए कि अदालत इस मामले पर लगातार नजर रखे हुए है।
अदालत ने डीजी को निर्देशों के अनुपालन में की गई कार्यवाही और जांच की रिपोर्ट के साथ हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करते रहने के आदेश भी दिए हैं।
हाईकोर्ट ने पूछा था, बड़ों को क्यों बचाया ?
हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए यह पूछा था कि बड़े पैमाने पर हुई धांधली में सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों की ही जिम्मेदारी तय की गई, बड़ों को क्यों बचाया गया।
ऐसे में बदली परिस्थितियों में जांच के घेरे में तत्कालीन ग्राम्य विकास मंत्री दद्दू प्रसाद और कृषि शिक्षा व कृषि अनुसंधान मंत्री राजपाल त्यागी के भी फंसने के आसार बन गए हैं।
जांच की आंच पूर्व मुख्यमंत्री मायावती तक भी पहुंच सकती है। इसके अलावा कई जिलों के डीएम, सीडीओ व मनरेगा से जुड़े अन्य उच्च अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ रही है।