विधानसभा चुनाव-2017 में प्रियंका गांधी वाड्रा की भूमिका को लेकर कांग्रेस में मतभेद उभर आए हैं। पार्टी के रणनीतिकार प्रशांत किशोर चाहते हैं कि दीपावली के बाद प्रदेश में प्रियंका के तूफानी दौरे कराए जाएं।
वहीं कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, राजबब्बर, शीला दीक्षित और संजय सिंह की अगुवाई में प्रचार अभियान चलाए जाने के पक्षधर हैं। विधानसभा चुनाव में वे प्रियंका का सीमित उपयोग चाहते हैं।
पीके की रणनीति के मुताबिक राहुल देवरिया से दिल्ली तक किसान यात्रा निकाल चुके हैं। इसके फॉलोअप में जिलों में राहुल संदेश यात्राएं निकाली जा रही हैं। कांग्रेसी मानते हैं कि किसान यात्रा को अच्छा रेसपॉन्स मिला है। उनके कार्यक्रमों में खासी भीड़ जुटी।
पीके चाहते हैं कि कांग्रेस के पक्ष में बने इस माहौल को वोट में तब्दील करने के लिए राहुल और प्रियंका लगातार यूपी में सक्रिय रहें।
प्रियंका की प्रतिष्ठा को दांव पर नहीं लगाना चाहते कांग्रेसी
प्रियंका सघन प्रचार करेंगी तो कांग्रेस को काफी फायदा मिलेगा। पर, कांग्रेस के ज्यादातर नेता राहुल की इस इस राय के साथ बताए जा रहे हैं कि प्रियंका की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाकर यूपी में चुनाव न लड़ा जाए।
प्रदेश भर में उनके तूफानी दौरे कराने के बजाय उन्हें चुनिंदा क्षेत्रों तक ही सीमित रखा जाए। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से बहुत अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद नहीं है। ऐसे में प्रियंका की ज्यादा सभाएं कराने से उनकी छवि को धक्का पहुंच सकता है।
हालांकि, टीम पीके के एक सदस्य प्रियंका को लेकर किसी तरह के मतभेद से इन्कार करते हैं। उन्होंने इन अटकलों को भी बेबुनियाद बताया कि कांग्रेस और प्रशांत किशोर में अनबन चल रही है और प्रशांत अपनी टीम को समेटने की तैयारी में हैं।
गेम चेंजर होंगी प्रियंका
प्रियंका अभी परदे के पीछे से कांग्रेस की रणनीति तैयार करने में मदद कर रही हैं। युवा ही नहीं, बुजुर्ग कांग्रेसी भी चाहते हैं कि प्रियंका यूपी में सक्रिय हों। अभी वे अमेठी और रायबरेली में भाई और मां के निर्वाचन क्षेत्रों तक ही खुद को सीमित रखती हैं।
उनकी सक्रियता बढ़ाने के लिए कई जगह पोस्टरों के जरिये अभियान भी चलाया जा चुका है। टीम पीके मानती है कि प्रियंका का प्रचार में उतरना कांग्रेस के लिए गेम चेंजर होगा। कांग्रेस को प्रदेश में अपना खोया जनाधार प्राप्त करने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए।
ब्राह्मणों के बाद दलितों पर टीम पीके की नजर
चुनाव में कांग्रेस की स्थिति मजबूत करने के लिए टीम पीके की नजर ब्राह्मणों के बाद दलित वोटों पर है। प्रशांत किशोर कांग्रेस से दलितों को जोड़ने की कार्ययोजना बना रहे हैं। इसके लिए उनकी टीम फीडबैक जुटा चुकी है। पुराने दौर में ब्राह्मण और दलित, दोनों ही कांग्रेस के वोट बैंक हुआ करते थे।