वहीं कभी सोनिया के करीबी रहे दिनेश प्रताप सिंह कांग्रसे से विधान परिषद सदस्य चुने गए। उनके भाई राकेश सिंह कांग्रेस के टिकट पर ही हरचंदपुर से विधायक हैं। बड़े भाई अवधेश सिंह रायबरेली जिला पंचायत के अध्यक्ष हैं।
दिनेश प्रताप सिंह ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। भाजपा ने उन्हें सोनिया गांधी के खिलाफ रायबरेली से उम्मीदवार बनाया। इस पर कांग्रसे ने दिनेश प्रताप के खिलाफ कार्रवाई के लिए विधान परिषद के सभापति के समक्ष याचिका दाखिल कर रखी है।
क्या है वजह
सूत्रों का कहना है कि शुरू में तो भाजपा ने चुनावी समीकरणों के नाते भड़ाना के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। इसकी बड़ी वजह गुर्जरों की नाराजगी का डर था। कांग्रेस में शामिल होने से कुछ दिन पहले ही भड़ाना ने भाजपा के सामाजिक प्रतिनिधि सम्मेलन में प्रदेश सरकार में गुर्जरों के प्रतिनिधित्व का सवाल उठाया था। कहा था कि गुर्जर समाज को मंत्रिमंडल में जगह मिलनी चाहिए। ऐसे में यदि भड़ाना के खिलाफ उस समय कार्रवाई होती तो पार्टी को नुकसान होने का डर था।
भड़ाना के खिलाफ अब तक याचिका दायर न करने के सवाल पर भाजपा की प्रदेश अनुशासन समिति के अध्यक्ष सत्यदेव सिंह कहते हैं कि पार्टी के जो लोग भी दूसरी पार्टियों से चुनाव लड़े हैं, उनके बारे में जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विधानसभा में पार्टी के नेता होने के नाते याचिका दाखिल करने पर फैसला करेंगे।
सभापति व अध्यक्ष करेंगे फैसला
कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू का कहना है कि दिनेश प्रताप सिंह पर दलबदल विरोधी कानून लागू होता है। वह विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिए बिना कांग्रेस में शामिल हुए। कांग्रेस ने उनकी सदस्यता समाप्त कराने के लिए विधान परिषद के सभापति को याचिका दी है। सभापति को इस पर सुनवाई कर फैसला लेना है। हरचंदपुर से विधायक राकेश सिंह के मामले में भी याचिका पर विधानसभा अध्यक्ष को फैसला करना है।