सुल्तानपुर जिले में डीएपी की किल्लत को लेकर कांग्रेस ने बुधवार को कलेक्ट्रेट का घेराव किया। कोतवाल नारद मुनि से झड़प होने पर कांग्रेसी भड़क गए। इस दौरान पुलिस और कांग्रेसियों में जमकर धक्कामुक्की हुई। कांग्रेस कार्यकर्ता काफी देर तक कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर बैठे रहे। एसडीएम और सीओ ने उन्हें समझाने का प्रयास किया।
प्रदर्शन को लेकर यूपी कांग्रेस ने एक्स पर लिखा कि सुल्तानपुर में आज कांग्रेसजन जिले में डीएपी खाद की किल्लत, नहरों में पानी न आने, बंद पड़ी चीनी मिल, धान खरीदी शुरू न होने जैसी किसानों की कई समस्याओं को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। यह प्रदर्शन किसान विरोधी भाजपा सरकार की आँखों में ऐसे चुभा कि उसकी एजेंट पुलिस ने इसे रोकने के लिए एड़ी-छोटी की ताकत लगा दी।
वहां मौजूद एक कोतवाल साहब कैसे कांग्रेसजनों पर बिगड़े, उसकी एक झलक देखिये! उन्होंने एक कांग्रेस नेता को मारकर उसका जबड़ा फाड़ दिया, इसके बाद जब उन्हें और गुस्सा आया तो सबके सामने अपना शर्ट फाड़कर बॉलीवुड के हीरो जैसा फील करने लगे।
भाजपा की किसानों से ऐसी दुश्मनी है कि वे उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं, किसी भी स्तर तक जा सकते हैं। उन्होंने अपने सारे अधिकारियों को भी किसानों का अहित करने के काम पर लगा रखा है।
बहरहाल, इन सारी बातों के अलावा इस कोतवाल साहब की हीरोगिरी के बारे में समझ नहीं आ रहा है... ये क्यों इतने उतावले हुए जा रहे हैं? इन्हें विपक्ष से कुछ ख़ास दिक्कत है या किसानों से? या फिर ये बाबा और उनके नुमाइंदों के दरबार में अपना नम्बर बढाने के लिए ज्यादे ही लालायित हैं? शांतिपूर्वक प्रदर्शन से इस सज्जन को क्या तकलीफ थी भाई?
इन महोदय पर कार्रवाई होनी चाहिए ताकि ये लोकतांत्रिक ढंग से चल रहे प्रदर्शन की ताकत को भलीभांति समझ पाएं।