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यूपी: राज्यसभा के फेर में ठहरीं कांग्रेस की चुनावी तैयारियां

Wed, 07 Dec 2016 12:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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यूपी कांग्रेस की चुनावी तैयारियां राज्यसभा के चक्कर में फंस कर रह गई हैं। प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद हों या फिर प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर दोनों ही राज्यसभा के सदस्य हैं।
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प्रदेश समन्वय समिति के अध्यक्ष प्रमोद तिवारी व प्रचार समिति के चेयरमैन संजय सिंह भी राज्यसभा में हैं। जब भी संसद सत्र चलता है तो यूपी कांग्रेस के सभी बड़े नेता उसमें व्यस्त हो जाते हैं। इसका सीधा असर पार्टी की चुनावी गतिविधियों पर पड़ रहा है।

इस समय प्रदेश कांग्रेस की टॉप लीडरशिप राज्यसभा की सदस्य है। सत्र के दौरान सभी नेता दिल्ली में रहते हैं। इस कारण सूबे में गतिवधियां ठप पड़ जाती हैं। पहले से घोषित कार्यक्रमों में भी बड़े नेता नहीं पहुंच पाते।
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25 नवंबर को नोटबंदी के खिलाफ कानपुर में रिजर्व बैंक का घेराव था। इसमें प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर को आना था लेकिन वह ऐन मौके पर नहीं आए।
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रस्म अदायगी भर रह गया नोटबंदी के खिलाफ प्रदर्शन

इसी प्रकार 28 नवंबर को नोटबंदी के खिलाफ जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन होना था। सभी वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन के नेतृत्व की जिम्मेदारी दी गई।

लखनऊ में प्रदेश अध्यक्ष को कमान संभालनी थी लेकिन राज्यसभा में व्हिप जारी हो गया। ऐसे में गुलाम नबी आजाद, राज बब्बर, प्रमोद तिवारी, संजय सिंह, पीएल पुनिया व राजीव शुक्ला जैसे वरिष्ठ नेता अपने-अपने जिलों में नहीं पहुंच पाए। ऐसे में यह प्रदर्शन रस्म अदायगी बनकर रह गया।

वहीं, चार दिसंबर को प्रदेश कांग्रेस दफ्तर में दलितों के सम्मेलन के बाद दलित स्वाभिमान यात्रा निकाली गई।

इसमें प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद को आना था, लेकिन रविवार होने के बावजूद वे नहीं आए। राज बब्बर ने यात्रा को हरी झंडी दिखाई।

तीन दिन राज्यसभा में व तीन दिन शूटिंग में बिजी अध्यक्ष

संसद सत्र के दौरान प्रदेश कांग्रेस दफ्तर में सन्नाटा रहता है। प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर भी वीकएंड पर ही लखनऊ आ पाते हैं।

उनके न रहने पर सूबे की चुनावी गतिविधियों को रफ्तार नहीं मिल पा रही। एक वरिष्ठ कांग्रेसी कहते हैं कि हमारे अध्यक्ष तीन दिन राज्यसभा में व्यस्त रहते हैं जबकि तीन दिन शूटिंग में लगे रहते हैं।

दिल्ली से संचालित हो रही है यूपी कांग्रेस
यूपी कांग्रेस की गतिविधियां दिल्ली से ही संचालित हो रही हैं। गुलाम नबी, राज बब्बर, प्रमोद तिवारी, संजय सिंह व पीएल पुनिया राज्यसभा सदस्य हैं। मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार शीला दीक्षित भी दिल्ली में ही रहती हैं। इसलिए सूबे के लिए कार्यक्रम दिल्ली से ही घोषित कर दिया जाता है।

दिल्ली में ही बैठकर ये नेता सूबे के लिए रणनीति तय कर देते हैं। नोटबंदी में भी कांग्रेस उलझ गई है। पहले से सुस्त चल रही चुनावी तैयारियों को इससे झटका लगा है।
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जंबो कार्यकारिणी पर पहले नाराजगी फिर किया स्वीकार

राज बब्बर व गुलाम नबी आजाद - फोटो : amar ujala
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव गुलाम नबी आजाद को जब प्रदेश प्रभारी बनाया गया तो उन्होंने लखनऊ आकर सबसे पहले सूबे की जंबो कार्यकारिणी पर नाराजगी जताई थी। कहा था कि कार्यकारिणी छोटी होनी चाहिए।

पर, समय के साथ-साथ उन्होंने भी भारी-भरकम कार्यकारिणी स्वीकार कर ली है। चुनावी साल में किसी को नाराज न करने की वजह से कार्यकारिणी में पूर्व अध्यक्ष निर्मल खत्री की ही आज भी चल रही है। मीडिया टीम में भी पुराने लोग मौजूद हैं।
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