यूपी में मोदी का खौफ सिर्फ सपा से ज्यादा कांग्रेस को सता रहा है। यही वजह भी है कि देश की सबसे बड़ी पार्टी ने अब तक काशी से मोदी के खिलाफ प्रत्याशी का एलान नहीं किया है।
दरअसल, इसके पीछे कांग्रेस की बड़ी चाल है। कांग्रेस पर्दे के पीछे रहकर ही अभी दूसरी पार्टियों को सेट करने की कोशिश में जुटी है। कोशिश है, नॉन-मोदी वोट्स के भटकाव को कम करने की।
सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व मुलायम सिंह यादव को मनाने में लगा हुआ है ताकि वे काशी से कैलाश चौरसिया को मैदान से हटा लें।
इतना ही नहीं, कांग्रेस के नेता कौमी एकता दल से भी बात करके माफिया मुख्तार अंसारी को मैदान से हटाने की जुगत भिड़ा रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो मोदी के खिलाफ कांग्रेस के उम्मीदवार की दावेदारी मजबूत हा जाएगी।
इसलिए नहीं किया नाम का एलान
कांग्रेस नेतृत्व लंबे समय से मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा के खिलाफ धर्म निरपेक्ष दलों को एक साथ खड़े होने की वकालत करता रहा है।
केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने बुधवार को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की बैठक में कहा भी, 'सभी को यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि सिर्फ कांग्रेस ही भाजपा का सामना कर सकती है।'
शर्मा ने कहा कि लोगों को सुनिश्चित करना होगा कि धर्म निरपेक्ष वोट न बंटने पाएं। यहां इस बात का जिक्र जरूरी हो जाता है कि वाराणसी को छोड़कर कांग्रेस ने यूपी की बाकी सभी सीटों से अपने प्रत्याशियों का एलान कर दिया है।
वजह साफ है, कांग्रेस ने मोदी के खिलाफ कद्दावर नेता को खड़ा करने का वादा किया है और उसकी हार पार्टी की हार के रूप में मुंह चिढ़ा सकती है।
कांग्रेस को उम्मीद, मुलायम देंगे साथ
इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर के मुताबिक कांग्रेस सूत्र भी इस बात की तस्दीक कर रहे हैं। एक कांग्रेस नेता ने बताया, 'हम सपा व अन्य पार्टियों के नेताओं से संपर्क में हैं, ताकि मोदी के खिलाफ कांग्रेस के प्रत्याशी को एंटी-मोदी वोट सीधे मिल सकें।'
कांग्रेस के इस सूत्र की मानें तो उन्हें सपा नेतृत्व से मोदी के खिलाफ सेक्यूलर फोर्स को मजबूत करने में मदद की पूरी उम्मीद है।
कांग्रेस और सपा के बीच पहले ही सांठ-गांठ बनी हूई है। एक तरफ, सपा ने अमेठी और रायबरेली से प्रत्याशी नहीं उतारे तो कांग्रेस ने भी मुलायम और उनकी बहु डिंपल यादव के खिलाफ किसी को टिकट नहीं दिया।
अब कांग्रेस इसी सूज-बूझ को काशी के मैदान में अपने लिए इस्तेमाल करने की कोशिश में लगी हुई है।
केजरीवाल अडिग, अंसारी को पटाओ
कांग्रेस को यह अच्छे से पता है कि मोदी के खिलाफ अरविंद केजरीवाल किसी भी कीमत पर अपना नाम वापस नहीं ले सकते। इसीलिए, पार्टी की ओर से केजरीवाल से बातचीत करने की कोशिश नहीं हो रही है।
लेकिन, कौमी एकता दल के उम्मीदवार माफिया मुख्तार अंसारी से जरूर कांग्रेस कैंप घबराया हुआ है। इसी वजह से इस पार्टी से भी संपर्क साधा गया है।
कांग्रेस को उम्मीद है कि अगर अंसारी मैदान छोड़ते हैं, तो मुस्लिम वोट कांग्रेस के पाले में आ सकता है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो फायदा मोदी का है।
कांग्रेस को 2004 लोकसभा चुनाव की जीत दोहराने के लिए खासे पापड़ बेलने हैं, लेकिन 2009 में अंसारी ने मुरली मनोहर जोशी से सिर्फ 17 हजार वोट पीछे रहकर यह उम्मीद जगा दी थी कि यह भाजपा का गढ़ नहीं।