प्रदेश में होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस की हालत सबसे पतली नजर आ रही है। इस समय कांग्रेस के पास न तो प्रदेश संगठन है और न ही जिला व शहर इकाइयां।
ऐसे में बगैर संगठन के कांग्रेस की चुनावी वैतरणी पार लगना मुश्किल ही लग रहा है।
चुनाव आयोग ने प्रदेश के 11 विधानसभा व एक लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव की घोषणा कर दी है। यूं तो आयोग ने भी राजनीतिक दलों को चुनावी तैयारियों के लिए बहुत कम समय दिया है।
आयोग ने दिया सिर्फ चार दिन का वक्त
प्रदेश में 13 सितंबर को वोट डाले जाएंगे जबकि नामांकन प्रक्रिया 20 से 27 अगस्त के बीच चलेगी। 28 अगस्त को नामांकन पत्रों की छंटनी की जाएगी।
इस तरह चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को केवल चार दिन का ही समय दिया है। एक ओर जहां सपा और भाजपा की तैयारियां पुरजोर तरीके से चल रही है। उनका संगठन मजबूती से खड़ा है।
वहीं कांग्रेस चुनावी तैयारियों में सबसे पीछे है। पार्टी अभी तक प्रत्याशियों का चयन ही नहीं कर सकी है। साथ ही उसके संगठन की भी हालत खस्ता है।
मुकाबले में ही नहीं पार्टी
लोकसभा चुनाव के बाद ही कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश संगठन के साथ ही जिला व शहर इकाइयों को भंग कर दिया था। जब संगठन ही नहीं है तो उपचुनाव में पार्टी किसके बूते मैदान में उतरेगी?
राजनीतिक विश्लेषक इन हालात को देख यह मान रहे हैं कि उपचुनाव में कांग्रेस दूर-दूर तक कहीं मुकाबले में नहीं दिखेगी।
इस पर कांग्रेस कम्युनिकेशन विभाग के चेयरमैन सत्यदेव त्रिपाठी कहते हैं कि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि कांग्रेस की चुनावी तैयारियां जीरो हैं। प्रत्याशियों के चयन के लिए प्रेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
शीघ्र ही कांग्रेस संसदीय बोर्ड यूपी के उपचुनाव के लिए प्रत्याशियों की घोषणा कर देगा। जहां तक संगठन की बात है तो जिला व शहर अध्यक्षों की सूची भी बहुत जल्द जारी हो जाएगी।