कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी स्वीकार करते हैं कि बिना ठोस कार्ययोजना बनाए यूपी में भाजपा का विकल्प बनना मुमकिन नहीं है। वर्तमान में बड़े नेता सिर्फ चर्चित मुद्दों को ही हाथ में ले रहे हैं।
मगर, प्रदेश में पार्टी की ठोस जमीन तैयार करने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। अगर यहां पार्टी को मजबूती के साथ खड़ा करना है तो घोषणाओं पर अमल करना होगा। अमल न हो पाने की स्थिति में जवाबदेही भी तय करनी होगी। जिससे भविष्य में सबक लिए जा सकें।
गौरतलब है कि वर्तमान में यूपी में कांग्रेस वर्ष 1977 के बाद सबसे खराब स्थिति में है। लोकसभा में उसके बाद सिर्फ एक सीट है, जहां से खुद कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी सांसद हैं। विधानसभा में भी कांग्रेस के पास अब तक की सबसे कम सीटें हैं। विधान परिषद में तो उसके मात्र एक सदस्य ही हैं।