राजधानी लखनऊ में कांग्रेस ने 18 दिसंबर को होने वाले विधानभवन घेराव को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। इस क्रम में सभी जिलों में पूर्व विधायकों को लोगों को जोड़ने के लिए पर्यवेक्षक बनाया गया है। इस रणनीति के जरिये पार्टी ने दो लक्ष्य साधे हैं। पहला, विरोध प्रदर्शन के लिए ज्यादा भीड़ जुटाई जा सकेगी, वहीं दूसरी ओर पूर्व विधायकों को सक्रिय होकर कौशल दिखाने का मौका दिया है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने बिजली के निजीकरण और महिलाओं पर अत्याचार बढ़ने आदि आरोप लगाते हुए 18 दिसंबर को विधानभवन घेराव की घोषणा की है। शनिवार को सभी 75 जिलों में घेराव के लिए पर्यवेक्षक के तौर पर पूर्व विधायकों, पूर्व एमएलसी व पूर्व मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी गई।
भाजपा के कुशासन के विरोध में है प्रदर्शन-अनिल यादव
पार्टी के निवर्तमान प्रदेश महासचिव संगठन अनिल यादव ने कहा कि यह प्रदर्शन भाजपा के कुशासन के विरोध में है। पार्टी की ओर से जारी सूची में पर्यवेक्षकों को उनका गृह क्षेत्र नहीं दिया गया है। इसमें पूर्व विधायक सतीश आजमी को लखनऊ और पूर्व मंत्री राजबहादुर को बाराबंकी की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह अन्य जिलों के लिए भी घोषणा की गई।