सातवें चरण के चुनाव से पहले ही कांग्रेस 40 में से 31 सीटों पर लड़ाई से बाहर है। वह इस चरण में केवल नौ सीटों पर लड़ रही है। चंदौली व भदोही जिलों में कांग्रेस एक भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ रही है।
सपा से गठबंधन के बाद कांग्रेस को सातवें चरण में मात्र नौ सीटें ही मिली हैं। बाकी 31 सीटों पर सपा के उम्मीदवार खड़े हैं। हालांकि 2012 के विधानसभा चुनाव में इन सात जिलों की 40 विधानसभा सीटों में सपा को 24 व कांग्रेस को मात्र तीन सीटों पर ही विजय मिली थी। ऐसे में सपा ने इन क्षेत्रों में कांग्रेस को सिर्फ नौ सीटें दी हैं।
कांग्रेस को सबसे अधिक चार सीटें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मिली हैं। यहां वाराणसी उत्तर से समद अंसारी, दक्षिण से पूर्व सांसद राजेश मिश्रा, कैंट से अनिल श्रीवास्तव और पिंडरा से वर्तमान विधायक अजय राय चुनाव लड़ रहे हैं।
जौनपुर जिले में कांग्रेस को दो सीटें मिली हैं। जौनपुर शहर से विधायक नदीम जावेद व मुंगरा बादशाहपुर से अजय शंकर दुबे अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। गाजीपुर की मोहम्मदाबाद सीट से कांग्रेस के डॉ. जनक कुशवाहा लड़ रहे हैं। मिर्जापुर के मड़िहान से वर्तमान विधायक ललितेशपति त्रिपाठी फिर से जनता के बीच हैं जबकि सोनभद्र की दुद्धी सीट से अनिल गोंड चुनाव लड़ रहे हैं।
कांग्रेस व सपा गठबंधन ने वाराणसी में पूरी ताकत झोंक दी है। जिले की आठ सीटों में चार पर कांग्रेस किस्मत आजमा रही है जबकि चार सीटें सपा के खाते में हैं। शहरी क्षेत्र की सभी तीन सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ रही है।
यहां कांग्रेस ने अपने सभी दिग्गज उतार दिए हैं। शनिवार को अखिलेश व राहुल ने एक मेगा रोड शो भी किया। इसमें गुलाम नबी आजाद, राज बब्बर, सुशील शिन्दे एवं अशोक गहलौत जैसे नेता शामिल रहे। पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला, पूर्व सांसद मीम अफजल भी वाराणसी में गठबंधन प्रत्याशियों का प्रचार कर रहे हैं।