कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी
उत्तर प्रदेश की सत्ता से करीब 27 साल से दूर रहने वाली कांग्रेस का इस विधानसभा चुनाव में शर्मनाक प्रदर्शन ने उसकी हालत और खराब कर दी है। पार्टी महज सात विधानसभा सीटों में सिमट कर रह गई है।
उसकी स्थिति कुछ जिलों तक सिमटे क्षेत्रीय दलों से भी बदतर हो गई है। कांग्रेस के बड़े-बड़े दिग्गज नेता भी चुनाव हार गए हैं। इससे पार्टी के कार्यकर्ता पूरी तरह टूट गए हैं। अब पार्टी के लिए अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा उठाना एक बड़ी चुनौती है। पार्टी के लिए संगठन को चुस्त-दुरुस्त करना आसान नहीं है।
फिलहाल स्थिति यह है कि अगर समय पर ध्यान न दिया तो वर्ष 2019 के चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी को सूबे से बड़ी निराशा हाथ लगेगी। इसके लिए पार्टी को नए सिरे से संगठन को ठीक करना होगा।
पार्टी आलाकमान को अपने कार्यकर्ताओं यह विश्वास पैदा करना होगा कि कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है, जो भाजपा का विकल्प बन सकती है। मगर, इसके लिए सूबे में संगठन को मजबूत करना होगा। यह तभी संभव होगा, जब सूबे में कमान किसी मजबूत नेता को सौंपी जाए।