सियासी दोस्ती परवान चढ़ने से पहले सपा और कांग्रेस के बीच सांप-छछूंदर का खेल शुरू हो गया है। शुक्रवार को गठबंधन के औपचारिक एलान की अटकलों के बीच जिस तरह से सपा ने 208 उम्मीदवारों की सूची जारी की, उससे कांग्रेस में खलबली मच गई।
लखनऊ से दिल्ली तक पार्टी में हड़कंप मच गया और सियासी हलकों में सपा-कांग्रेस का गठबंधन टूट जाने की चर्चाएं चल पड़ीं। इसकी वजह यह भी रही कि सपा ने उन सीटों पर भी अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए, जहां कांग्रेस के मौजूदा विधायक हैं।
इन्हीं चर्चाओं के बीच दोपहर बाद तकरीबन पौने तीन बजे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि आधिकारिक तौर पर वह कुछ नहीं कह सकते कि गठबंधन हो रहा है या नहीं।
अलबत्ता उन्होंने यह कहते हुए रालोद और पीस पार्टी जैसी छोटी पार्टियों से गठबंधन के संकेत जरूर दे दिए कि बदअमनी का माहौल पैदा करने वाली ताकतों के खिलाफ लड़ने वाले दूसरे साथियों को भी ताकत देनी है। इसके लिए रालोद और पीस पार्टी जैसे दलों से बात हो सकती है।
झटके से उबरने की कोशिश में लगी है कांग्रेस
- फोटो : AmarUjala
माना जा रहा था कि शुक्रवार को सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन का औपचारिक एलान कर दिया जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ होने से पहले ही सपा ने कांग्रेस को ‘झटका’ दे दिया। कांग्रेस अब इस झटके से उबरने की कोशिश में है।
दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान व बडे़ नेता बदली हुई परिस्थितियों के मद्देनजर रणनीति बनाने में जुटे हैं। इस बीच करीब साढ़े तीन बजे दिल्ली जाने के लिए कांग्रेस मुख्यालय से निकले राज बब्बर को एयरपोर्ट पर ही रोक दिया गया। उनसे लखनऊ में रुककर आलाकमान के अगले निर्देश का इंतजार करने को कहा गया है।
शाम को ऐसी खबरें भी तैरने लगीं कि राज बब्बर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने पहुंच रहे हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री आवास पर मीडिया का जमावड़ा लग गया। हालांकि राज बब्बर वहां नहीं पहुंचे।
राहुल-अखिलेश का अहं भी एक कारण
- फोटो : amar ujala
पार्टी सूत्रों की मानें तो सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन परवान चढ़ने में दोनों दलों के शीर्ष नेताओं का अहं भी आड़े आ रहा है।
अखिलेश चाहते हैं कि गठबंधन के एलान के लिए राहुल गांधी लखनऊ आएं जबकि कांग्रेस चाहती है कि अखिलेश दिल्ली आएं और वहीं राहुल के साथ मिलकर इसकी घोषणा करें।
दलबदल को लेकर भी खटपट
सूत्रों का कहना है कि गठबंधन की कवायद के बीच कांग्रेस की ओर से सपा के कुछ नेताओं को पार्टी में शामिल कराना भी सपा को रास नहीं आया। मुजफ्फरनगर के शाहनवाज राणा को कांग्रेस में शामिल किए जाने को लेकर अखिलेश नाराज हैं।
यही वजह है कि आनन-फानन में सूची जारी करके कांग्रेस को कड़ा संदेश देने के साथ-साथ गठबंधन धर्म का पालन करने का दबाव बनाने का दांव चला गया है। सपा के इस कदम से कांग्रेस फिलहाल बैकफुट पर दिखाई दे रही है क्योंकि बिना बैसाखी के चुनाव मैदान में उतरने की उसकी कोई तैयारी तक नहीं है।
गठबंधन नहीं हुआ तो क्या होगा...
सपा की ओर से प्रत्याशियों की सूची जारी किए जाने के बाद से कांग्रेस में पूरे दिन काफी गहमागहमी रही। प्रदेश कांग्रेस के नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक की जुबान पर एक ही सवाल था कि गठबंधन नहीं हुआ तो क्या होगा?
सूबे के नेताओं की निगाहें हाईकमान के अगले कदम पर हैं। हालांकि कांग्रेसी अभी पूरी तरह से नाउम्मीद नहीं हैं।
बड़े नेता दबी जुबान मान भी रहे हैं कि यह सपा की दबाव बनाने की रणनीति है और कोई न कोई रास्ता जरूर निकलेगा क्योंकि गठबंधन की जितनी दरकार कांग्रेस को है सपा को उससे कम नहीं।