भाजपा ही नहीं, कांग्रेस ने भी नरेन्द्र मोदी के सहारे ही अपनी चुनावी नैया पार लगने की आस लगा रखी है।
प्रदेश कांग्रेस दफ्तर का नजारा और नेताओं की निष्क्रियता को देखकर यह लग ही नहीं रहा है कि कांग्रेस भी चुनाव मैदान में उतरने जा रही है।
जहां बाकी दलों के दफ्तर गुलजार हैं, वहीं कांग्रेस कार्यालय में दिनभर सन्नाटा पसरा रहता है। चुनावी तैयारियों के नाम पर प्रदेश अध्यक्ष और उनकी टीम बयानबाजी तक ही सीमित है।
हाईकमान चुनाव को लेकर भले ही फिक्रमंद दिखाई दे रहा हो, पर यूपी के कांग्रेसियों को लग रहा है कि मोदी के मैदान में आ जाने से अब कुछ करने की जरूरत ही नहीं है।
मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण कांग्रेस के पक्ष में होगा और पार्टी मैदान मार लेगी। सुनहरे सपने पाले बैठे नेताओं को कौन समझाए कि हाथ-पैर हिलाये बिना किसी का कल्याण नहीं होता।