फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिजली सुधारों पर संघर्ष समिति ने सरकार के सामने रखा प्रस्ताव

Wed, 06 Jan 2021 12:05 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
निजीकरण की अटकलों के बीच प्रदेश की बिजली व्यवस्था में सुधार की समीक्षा के लिए मंगलवार से विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति व सरकार के बीच वार्ता का सिलसिला शुरू हुआ। पहले दौर में संघर्ष समिति ने बिजली सुधारों पर सरकार के सामने प्रस्ताव रखा जिस पर विस्तार से चर्चा हुई। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने सुधारों पर संघर्ष समिति के प्रस्ताव को सकारात्मक बताते हुए कहा कि बदलाव सही दिशा में दिख रहा है। अगले चरण में पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन सुधारों को लेकर अपना पक्ष रखेगा।
विज्ञापन


विधान भवन के तिलक हॉल में हुई समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव ऊर्जा, बिजली निगमों के प्रबंध निदेशक व विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में संघर्ष समिति की ओर से 22 अक्तूबर को दिए गए सुधार प्रस्तावों पर चर्चा हुई। ऊर्जा मंत्री ने सुधारों पर संघर्ष समिति के रुख पर खुशी जतातेे हुए कहा कि आगे भी इन प्रस्तावों पर चर्चा जारी रहेगी। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि संघर्ष समिति और प्रबंधन की चर्चा के बाद कार्ययोजना तैयार कर सुधार कार्यक्रम चलाए जाएंगे। खुशी है कि संघर्ष समिति के सभी प्रस्ताव उपभोक्ता हित में हैं और उपभोक्ताओं का हित हमारे लिए सर्वोपरि है।

पटियाला मॉडल लागू करने पर जोर
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि बिजली लाइन हानियों को कम करने के लिए प्रदेश में पटियाला मॉडल लागू किया जाना चाहिए। अन्य पदाधिकारियों ने बेहतर उपभोक्ता सेवा एवं लाइन हानियों को घटाकर अपेक्षित राजस्व वसूली का लक्ष्य हासिल करने के लिए मानक के अनुसार कार्मिकों के नए पदों के  सृजन व नियमित भर्तियां कराने पर जोर दिया। पदाधिकारियों ने कहा कि सुधार के नाम पर बड़े पैमाने पर निजी संस्थाओं के माध्यम से काम कराने से बिलिंग एवं अन्य कामों की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। इस पर नियंत्रण के लिए फ्रेंचाइजीकरण व्यवस्था को खत्म किया जाना चाहिए। 
विज्ञापन


बिजली निगमों का एकीकरण व दक्ष संविदा कर्मी नियमित हों
संघर्ष समिति ने दक्ष संविदा कर्मियों को तेलंगाना की भांति नियमित करने की मांग की। बिलिंग एवं वसूली व्यवस्था दुरुस्त करने, उपभोक्ताओं को बेहतर आपूर्ति, कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने जैसे सुझाव देते हुए कहा कि इसके बिना बिजली क्षेत्र में प्रभावी सुधार व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। समिति ने अव्यवस्थाओं को दूर करने, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण व सस्ती बिजली का लक्ष्य हासिल करने के लिए सभी बिजली निगमों का एकीकरण कर राज्य विद्युत परिषद लिमिटेड के गठन की जरूरत बताई।

शीर्ष प्रबंधन की जवाबदेही तय हुए बिना सुधार संभव नहीं
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली निगमों में शीर्ष प्रबंधन की जवाबदेही तय हुए बिना सुधार संभव नहीं है। 2002 से प्रदेश में बिजली विभाग व निगमों की कमान नौकरशाहों के हाथ में हैै। सुधार तो कुछ हुआ नहीं, हालात दिनों-दिन बिगड़ते चले जा रहे हैं। बिजली कंपनियों का घाटा 90 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सिर्फ निजीकरण से सुधार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जब तक बिजली निगमों को घाटे में पहुंचाने वाले शीर्ष प्रबंधन से लेकर नीचे तक के कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक न तो उपभोक्ताओं को कोई लाभ मिलेगा और न ही बिजली क्षेत्र में सुधार होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें