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अस्पतालों का हाल: कहीं तीन घंटे भर्ती बंद तो कहीं बरामदे में इलाज

Fri, 22 Jan 2016 01:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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सर्दी का सितम बढ़ते ही शहर के सरकारी अस्पताल मरीजों से पट गए, इमरजेंसी फुल हो गई। कोहरा और सर्दी बढ़ने के साथ सड़क हादसे में घायलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसके साथ ही सांस और हृदय रोग के मरीजों में भी इजाफा हुआ है।
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सिविल अस्पताल में बृहस्पतिवार को तीन घंटे तक मरीजों को बेड के लिए इंतजार करना पड़ा वहीं बलरामपुर अस्पताल में बरामदे में बेड डालकर इलाज शुरू कराया गया। लोहिया अस्पताल में मरीजों की भर्ती जारी रखने के लिए एक शिफ्ट में दो से तीन बार वार्ड में शिफ्टिंग करानी पड़ी जिससे इमरजेंसी में पहुंचने वाले रोगियों को उपचार दिया जा सके।

अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक अस्पतालों में पहुंचने वाले सबसे अधिक रोगी सड़क हादसे में घायल, सांस, हृदय, वायरल इंफेक्शन और कोल्ड डायरिया के हैं।
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सिविल अस्पताल की इमरजेंसी बृहस्पतिवार सुबह 11 बजे फुल हो गई। इमरजेंसी पहुंचने वाले मरीजों को बेड के लिए वार्ड के बाहर तीन घंटे तक स्ट्रेचर पर इंतजार करना पड़ा।

इस तरह किया जा रहा है इलाज

फैजाबाद के बृजेश दुबे (43) बुधवार शाम पांच बजे सड़क हादसे में घायल हो गए थे। उनके सिर और पैर में चोट आई थी। भाई राकेश दुबे ने बताया कि हादसे के बाद ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया और प्राथमिक उपचार के बाद बृहस्पतिवार सुबह दस बजे सिविल रेफर कर दिया।

सिविल पहुंचे तो डॉक्टर ने भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली लेकिन बेड खाली न होने पर दोपहर एक बजे तक वार्ड में भर्ती नहीं किया जा सका। इसी तरह अयोध्या के शुभम (20) को सड़क हादसे में घायल होने के बाद लोकबंधु अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने 108 एंबुलेंस से सिविल अस्पताल रेफर कर दिया लेकिन बेड खाली नहीं होने से वापस लौटा दिया गया। बलरामपुर अस्पताल में मरीजों की भीड़ का आलम ये है कि इमरजेंसी में पोर्टेबल बेड और स्ट्रेचर लगाया गया है जिसपर मरीजों को भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है।

लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में भी मरीजों के लगातार पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। मरीजों की भीड़ क्षमता से अधिक बढ़ने के बाद दिनभर में दो से तीन बार शिफ्टिंग करनी पड़ी जिससे इमरजेंसी में गंभीर रोगियों को भर्ती किया जा सके।

रोजाना 80 हो रहे डिस्चार्ज

अस्पतालों की इमरजेंसी में 24 घंटे के भीतर औसतन 55 से 60 मरीजों को भर्ती किया जा रहा है जिससे व्यवस्था बेपटरी होती जा रही है। बेड की उपलब्धता को बनाए रखने के लिए रोजाना औसतन 70 से 80 मरीज डिस्चार्ज किए जा रहे हैं।

अधिकारियों की मानें तो जिला अस्पतालों से रेफरल केस बढ़े हैं और इसी का नतीजा है कि क्षमता से अधिक मरीजों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

नियमानुसार इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीज को 18 से 24 घंटे तक भर्ती रखा जाता है लेकिन भीड़ अधिक बढ़ने की वजह से मरीजों को आठ से दस घंटे के भीतर ही वार्ड में शिफ्ट कर दिया जा रहा है।

अस्पताल--इमरजेंसी बेड--कुल क्षमता--कुल मरीज भर्ती
सिविल--30--450--460
बलरामपुर--40--650--656
लोहिया--35--400--410
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ट्रॉमा में बेड 250, मरीज 270

ट्रॉमा सेंटर में भी मरीजों को बेड मिलना मुश्किल हो रहा है। सबसे अधिक परेशानी न्यूरो और ऑर्थो मरीजों को हो रही है। बलरामपुर अस्पताल में सुबह आठ से शाम पांच बजे तक ट्रॉमा के 12 मरीजों को भर्ती किया गया जिसमें सात मरीज न्यूरो के थे।

जानकारी के मुताबिक, ट्रॉमा सेंटर के मेडिसिन, न्यूरो, ऑर्थो और सर्जरी वार्ड पूरी तरह फुल चल रहा है और गंभीर रोगियों को मजबूरी में स्ट्रेचर पर इलाज किया जा रहा है। कुल 250 बेड की क्षमता वाले ट्रॉमा सेंटर में करीब 270 से अधिक मरीजों को भर्ती किया गया है।

सिर्फ गंभीर रोगियों की भर्ती
सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आशुतोष दुबे का कहना है कि नए रोगियों को भर्ती करने के लिए पहले से भर्ती मरीजों को डिस्चार्ज करना ही आखिरी रास्ता है। ईएमओ को निर्देश है कि केवल गंभीर रोगियों को ही एडमिशन दिया जाए।

लोहिया अस्पताल के सीएमएस डॉ. ओंकार यादव ने बताया कि मौसम में बदलाव के बाद मरीज बढ़े हैं। सबसे अधिक सड़क हादसे में घायल, सांस, हृदय और वायरल के मरीज हैं। बलरामपुर अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि मरीजों की भीड़ अधिक होने पर बरामदे में आठ अतिरिक्त बेड लगाए गए हैं। किसी मरीज को बिना इलाज नहीं लौटाया जा रहा है।
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