आइसोलेशन वार्ड में भर्ती महिला डॉक्टर अपने मोबाइल में जुटी रहती हैं। अकेलापन दूर करने के लिए संगीत सुनती हैं। कभी धार्मिक तो कभी हंसी-मजाक वाले बेव सीरीज देखती रहती हैं।
इलाज में लगे डॉक्टर बताते हैं कि वह दोस्तों और परिवार से चैटिंग भी करती हैं। खासकर बच्चे से बात करती हैं। कुछ कॉल भी रिसीव करती हैं। देश-दुनिया के अखबारों को भी मोबाइल पर पढ़ती हैं। यही नहीं अपने शोध के काम को भी वह निपटाती रहती हैं।
नर्सिंग स्टाफ को बताती हैं कोरोना से बचाव की गाइडलाइन
डॉक्टरों के मुताबिक बीमार महिला डॉक्टर को अब किसी तरह की दिक्कत नहीं है। उन्हें फल व हल्का भोजन दिया जा रहा है। दवाएं भी सामान्य चल रही हैं। कुछ एंटीबायोटिक्स दी जा रही हैं। वह वार्ड में सामान्य व्यक्ति की तरह हैं। वार्ड में आने वाली नर्सिंग स्टाफ को बचाव के गाइडलाइन फॉलो करने की सीख देती हैं।
हंसी-मजाक के दौर के बीच डाटा बैंकिंग का काम
कोरोना से संक्रमित 21 वर्षीय युवक को शुरुआती दौर में कुछ डर लग रहा था। इलाज में लगे डॉक्टर बताते हैं कि आइसोलेशन वार्ड में आने के बाद उन्होंने कई सवाल किए। सवालों का जवाब मिलने के बाद से वह आश्वस्त हैं।
शनिवार दोपहर के बाद उन्होंने अपने लैपटॉप पर काम करना शुरू कर दिया है। डाटा बैंकिंग से लेकर अन्य काम आसानी से कर रहे हैं। लैपटॉप पर दोस्तों से भी बातचीत करते हैं। सभी को दिलासा देते हैं कि जल्द ही अस्पताल से घर आ जाएंगे। हंसी-मजाक का दौर भी चल रहा है।
मरीजों के इलाज में लगे केजीएमयू के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. डी हिमांशु के मुताबिक दोनों मरीजों की स्थिति सामान्य है। बुखार और सर्दी जुकाम का असर भी कम हो गया है। दोनों 21 दिन तक निगरानी में रहेंगे। फिलहाल उन्हें किसी तरह की दिक्कत नहीं महसूस हो रही है।
डॉ. डी. हिमांशु बताते हैं कि जिंदादिली दोनों मरीजों को रिकवर करने में मदद कर रही है। दोनों को लैपटॉप और मोबाइल आइसोलेट करने के बाद दिया गया है। अस्पताल से छुट्टी देते वजट गैजेट्स को सेनेटाइज्ड कर दिया जाएगा।