यूपी में प्रतियोगी परीक्षाएं कराना आसान नहीं है। यहां परीक्षाओं की गोपनीयता में सेंध लगाकर प्रश्न पत्र आउट कराने वाला वाला बड़ा रैकेट सक्रिय है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्न पत्र आउट होना कोई पहला केस नहीं है।
इससे पहले सीपीएमटी, बीएड, टीईटी, रेलवे, बीएसएफ समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक हो चुके हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन में विशेष गोपनीयता बरती जाती है।
साथ ही चुनिंदा लोग ही इसकी व्यवस्था से जुड़े होते हैं। प्रश्न पत्र बनवाना, उसकी प्रिंटिंग और परीक्षा केंद्रों पर पहुंचाने के कार्य कड़ी निगरानी में की जाती है। परीक्षा कराने वाली एजेंसी के टूल्स भी गोपनीय रखे जाते हैं।
यही नहीं परीक्षा के जुड़े कई काम दूसरे राज्यों में कराए जाते हैं। इसके बावजूद प्रश्न पत्र आउट कराने वाले गैंग किसी न किसी स्तर पर गोपनीयता में सेंध लगाने में कामयाब हो जाते हैं।
व्यापमं घोटाले के भी यूपी से जुड़े हैं तार
जांच में कुछ लोग पकड़ में आते हैं लेकिन धंधे पर रोक नहीं लग पाती है। यूपीपीएससी जैसी 77 साल पुरानी प्रतिष्ठित संस्था का प्रश्न पत्र परीक्षा से पहले रविवार को वाट्सएप पर वायरल होने से साबित हो गया है कि प्रश्न पत्र लीक कराने वालों के हाथ कितने लंबे हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र की गोपनीयता में सेंध लगाने वालों के तार दूसरे राज्यों से भी जुड़े हैं। मध्य प्रदेश में व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा कराई जाने वाली परीक्षा में घोटाला करने के मामले में यूपी के एक दर्जन से ज्यादा मेडिकल छात्र जेल जा चुके हैं।
इस घोटाले में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश के राज्यपाल राम नरेश यादव के बेटे शैलेश यादव का नाम आया था। कुछ दिन पहले ही शैलेश की लखनऊ में मौत हो चुकी है।
सिस्टम में लीकेज से आउट होता है प्रश्न पत्र
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. ओम प्रकाश बताते हैं कि संघ लोक सेवा आयोग, दिल्ली का प्रश्न पत्र रांची की कैथोलिक प्रेस में छपता था। एक पोस्टमास्टर का दोस्त इस प्रेस में काम करता था। कुछ कोचिंग सेंटर पोस्टमास्टर के जरिये किसी एक लिफाफे में एक पर्चा ज्यादा रखवाते थे।
बाद में पर्चा निकालकर पोस्टमास्टर उसे डिस्पेच करा देते थे। हाथ से लिखकर उसे कोचिंग सेंटरों को दे देते थे। पोस्टरमास्टर के निधन के बाद उसके बेटे ने पर्चा निकालने के बाद उनकी फोटो कॉपी करानी शुरू कर दी।
मामला लीक हुआ और सीबीआई जांच के बाद पूरे रैकेट का खुलासा हुआ। उन्होंने कहा कि इस घटना को याद दिलाने की वजह यह है कि किस तरह सिस्टम की एक लीकेज से प्रश्न पत्र आउट हो जाता है।
प्रतियोगी परीक्षा में प्रश्न पत्र को प्रश्न पत्र सेट करने वाले से लेकर परीक्षा केंद्र तक कई चैनलों से होकर गुजरना पड़ता है। बाबू स्तर से लेकर सेंटर इंचार्ज तक, किसी भी स्तर पर चूक हो जाने पर लाखों परीक्षार्थी छले जाते हैं।
इन परीक्षाओं के प्रश्न पत्र चुके लीक
अगस्त 2014 : लखनऊ में एसटीएफ ने बीएसएफ की रेडियो मैकेनिक और रेडियो ऑपरेटर की परीक्षा से चंद घंटे पहले दो से पांच लाख रुपये में पर्चा बेचने वाले गैंग को दबोचा था।
जुलाई 2014 : लखनऊ में रेलवे के असिस्टेंट रेलवे लोको पायलट परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक हो गया था। एसटीएफ ने लखनऊ में दो लोगों को गिरफ्तार किया। बाद में सीबीआई ने रेलवे के डिजीवनल पर्सनल अफसर व चीफ विजिलेंस कमिश्नर को भी गिरफ्तार किया था।
जून 2014 : गाजियाबाद में कम्बाइंड प्री-मेडिकल टेस्ट के प्रश्न पत्र बैंक के जिस लॉकर में रखे थे, इसकी सील में टैंपरिंग मिली थी। इस परीक्षा को रद्द कर दिया गया था।
जून 2013 : एसटीएफ ने मुजफ्फरनगर और दिल्ली में आरपीएफ कांस्टेबल की परीक्षा का प्रश्न पत्र आउट करने वाले गैंग को पकड़ा था। इसका सरगना एक कोचिंग सेंटर का संचालक था।
मई 2011 : एआईईईई का प्रश्न पत्र लीक हो गया था। सीबीएसई ने प्रश्न पत्र का सेट बदलकर तीन घंटे बाद परीक्षा कराई थी। इस मामले में एसटीएफ ने गाजियाबाद व लखनऊ से कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था।
वर्ष 2009 : बीएड प्रवेश परीक्षा का प्रश्न पत्र आउट होने के बाद परीक्षा स्थगित कर दी गई थी। एसटीएफ ने इस मामले में कई लोगों को पकड़ा था। यह परीक्षा लखनऊ विश्वविद्यालय ने आयोजित कराई थी।