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जंगली जानवरों से हमले में मौत को माना जाएगा दैवी आपदा, मृत्यु पर मिलेगा इतना मुआवजा

Fri, 21 Sep 2018 09:10 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : demo pic
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण की शासी निकाय की बैठक में नागरिकों पर जंगली जानवरों के हमले को दैवी आपदा मानने का फैसला हुआ है। हमले में घायल होने या मौत होने पर पीड़ित परिवारीजनों को मुआवजा भी देने का निर्णय लिया गया है। 
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मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जंगली जानवरों के हमलों से होने वाली जनहानि पर राज्य आपदा मोचक निधि से मुआवजा देने के निर्देश दिए। ऐसी घटनाओं में मृत्यु पर पांच लाख रुपये और घायल होने पर नुकसान के हिसाब से तय मानक पर मुआवजा देने का फैसला किया गया है। वर्तमान में ऐसी घटनाओं पर वन विभाग मुआवजा देता है, लेकिन बजट की कमी से समय से राहत पहुंचाने में मुश्किल आती है। 

इसे देखते हुए अब मुआवजा राज्य आपदा मोचक निधि से देने का फैसला हुआ है। गौरतलब है कि प्राधिकरण का हाल ही पुनर्गठन हुआ है। यह बैठक करीब छह साल बाद हुई। प्रमुख सचिव राजस्व सुरेश चंद्रा ने बैठक में प्राधिकरण की पिछली बैठक के निर्णय व उसके क्रियान्वयन व आगे की कार्ययोजना पेश की।
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इन जानवरों के हमले राज्य आपदा घोषित

बाघ, शेर, तेंदुआ, लकड़बग्घा, हाथी, गैंडा, भेड़िया, मगरमच्छ और जंगली सुअर।

राज्य आपदा में खर्च दोगुना करने का प्रस्ताव
प्रदेश सरकार राज्य आपदा मोचक निधि का 10 प्रतिशत हिस्सा वर्तमान में राज्य घोषित आपदाओं पर खर्च कर सकती है। सरकार ने हाल के दिनों में कई आपदाओं को राज्य आपदा घोषित किया है। मुख्यमंत्री ने इसे बढ़ाकर 20 फीसदी करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजने का निर्देश दिया।

सीएम ने उप्र. राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण (यूपीएसडीएमए)  तथा स्टेट डिजास्टर रेस्पॉन्स फ ोर्स (एसडीआरएफ ) को और अधिक प्रभावी बनाने को कहा। राज्य में आपदा के प्रभावी प्रबंधन की कार्य योजना में आपदा के प्रभाव को कम करने तथा राहत के प्रबंध को भी शामिल करने के  निर्देश दिए।
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पाठ्यक्रम में शामिल हो आपदा प्रबंधन

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के संबंध में लोगों को जागरूक करने के लिए आपदा प्रबंध विषय को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए जिससे स्कूली बच्चे बचाव व राहत के उपाय सीख सकें। आम लोगों के साथ सिविल डिफेंस व युवक मंगल दल के सदस्यों को भी जोड़कर प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए।

सीएम ने यूपीएसडीएमए में विशेषज्ञों व अन्य जरूरी स्टाफ की नियुक्ति में तेजी लाने और स्टाफ और विशेषज्ञों की तैनाती में व्यापक अनुभव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसके लिए एक कमेटी बनाने का फैसला हुआ। मुख्यमंत्री ने प्राधिकरण के शासी निकाय की बैठक हर वर्ष दो बार करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन के संबंध में ज्यादा जानकारी के लिए डेटा सेंटर की स्थापना का भी निर्देश दिया। उन्होंने घोषित आपदाओं व दी जाने वाली राहत के प्रचार-प्रसार के भी निर्देश दिए।
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