विधान परिषद ने भी बुधवार को योगी सरकार के 11388 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट को मंजूरी दे दी। विधानसभा पहले ही बजट को मंजूर कर चुकी है। परिषद में बजट को मंजूरी से पहले विपक्ष ने सत्तापक्ष पर कई प्रहार किए और अनुपूरक बजट के कई प्रावधानों पर सवाल उठाए।
सपा, बसपा और कांग्रेस सहित विपक्ष के कई सदस्यों ने बजट को आधारहीन, दिशाहीन, दलित, किसान और अल्पसंख्यक विरोधी बताया। सत्ता पक्ष ने अनुपूरक बजट को जनता की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को पूरी करने वाला बताया।
नेता सदन डॉ. दिनेश शर्मा ने विपक्ष के आरोपों व सवालों का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष को विकास रास नहीं आ रहा है। उसे कानून-व्यवस्था का शासन भी पसंद नहीं आ रहा है। भाजपा सरकार ने काफी कुछ ठीक किया है। पुलिस का मनोबल बढ़ा है। पहले मुठभेड़ में पुलिस मरती थी अब अपराधी मर रहे हैं।
बजट पर चर्चा आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस के नेता दिनेश प्रताप सिंह ने सरकार से पूछा कि सामान्य बजट का कितना धन अभी तक उपयोग किया गया है। आरोप लगाया कि 75 जिलों की जनता के टैक्स के धन का उपयोग केवल काशी, मथुरा, गोरखपुर और अयोध्या के विकास पर किया जा रहा है।
अमेठी और रायबरेली के विकास की अनदेखी की जा रही है। आरोप लगाया कि गुजरात चुनाव में खर्च हुए धन की भरपाई के लिए स्कूलों के लिए स्वेटर खरीद नहीं की जा रही है। रायबरेली में एम्स अस्पताल पर दो सौ करोड़ खर्च करने के बाद भी अस्पताल का निर्माण पूरा नहीं कराया जा रहा है। रायबरेली की नहरों के लिए बजट नहीं दिया गया है।
बसपा के सुनील कुमार चित्तौड़ ने कहा कि सरकार सामान्य बजट का 50 फीसदी धन अभी खर्च नहीं कर पाई है। मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री 24 घंटे बिजली देने की बात कर रहे हैं लेकिन आलम यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी आगरा को 24 घंटे बिजली नहीं मिल रही है।
कहा कि प्रदेश में 25 फीसदी आबादी एससी-एसटी की है, लेकिन उनके लिए केवल 33 करोड़ बजट दिया है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में दलित छात्रों की छात्रवृति बंद कर दी गई है। आरोप लगाया कि सरकार अल्पसंख्यक, दलित, किसान और आमजनता की विरोधी है।