बसपा सुप्रीमो मायावती ने यूपीकोका का राजनीतिक विरोधियों के दमन में इस्तेमाल होने की आशंका जताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। बुधवार को जारी बयान में उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में वैसे ही राजनीतिक, जातीय और सांप्रदायिक विद्वेष से कानून का काफी दुरुपयोग किया जा रहा है।
ऊपर से महाराष्ट्र के मकोका की तर्ज पर बनाए गए ‘यूपीकोका’ लाकर भाजपा सरकार ने विरोधियों की जुबान पर ताला डालने की साजिश रची है। जो भी सरकार का विरोध करेगा, उसके खिलाफ इस कानून का दुरुपयोग किया जाएगा। सरकार ने इस जनविरोधी कानून को वापस न लिया तो बसपा को इसके विरोध में मैदान में उतरेगी।
मायावती ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार की द्वेषपूर्ण व जातिवादी नीति के कारण पूरे प्रदेश में कानून का बहुत बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल करके निर्दोष दलितों, पिछड़ों व अकलियतों को गलत मुकदमों में फंसाकर जेलों की सलाखों के पीछे भेजा जा रहा है।
इसका उदाहरण अलीगढ़ है, जहां उर्दू में शपथ लेने पर अलीगढ़ के एक बसपा पार्षद पर सांप्रदायिक भावना भड़काने का गलत आरोप लगाकर मुकदमा कायम कर दिया गया। माफिया और अपराधियों पर कार्रवाई के लिए चलाए गए अभियान में भी राजनीतिक व जातीय विद्वेष से लोगों को सूचीबद्ध किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के लोग कानून हाथ में लेने के साथ संगठित अपराध, गुंडागर्दी व माफियागीरी कर रहे हैं, पर इन पर कार्रवाई के बजाय संरक्षण दिया जा रहा है।