नोटिस और चेतावनी के बाद भी जिन कार्यदायी संस्थाआें ने कर्मचारियों का ईपीएफ जमा नहीं किया, उनका भुगतान रोका जाएगा। यह प्रतिबंध मई से लागू किया गया है, क्योंकि नगर निगम अप्रैल तक काभुगतान कर चुका है। इसके साथ ही जो कार्यदायी संस्थाएं ईपीएफ का पैसा नगर निगम से लेने के बावजूद उसे कर्मचारियों के खाते में जमा नहीं कर रही हैं, उन्हें काली सूची में डाला जाएगा।
नगर में इस समय करीब 50 कार्यदायी संस्थाएं काम कर रही हैं। इनमें सबसे अधिक संस्थाएं सफाई कार्य में लगी हैं। नगर निगम के सभी विभागों में करीब 15 हजार कर्मचारी कार्यदायी संस्थाओं के जरिये लगे हैं। इनमें ज्यादातर कर्मचारियों का ईपीएफ जमा करने में फर्जीवाड़ा कर रही हैं। इसे लेकर नगर निगम प्रशासन ने करीब छह महीने पहले सभी कार्यदायी संस्थाओं को चेतावनी के साथ नोटिस भी जारी किए थे। उसके बाद भी संस्थाएं सुधर नहीं रही हैं।
ईपीएफ को लेकर होगी कार्यशाला
अप्रैल तक कार्यदायी संस्थाओं का भुगतान हो चुका है, मगर मई से आगे का जो भी भुगतान होगा वह तभी होगा जब कार्यदायी संस्थाएं सभी कर्मचारियों का ईपीएफ जमा करने का प्रमाण देंगी। ईपीएफ की जांच में जिन संस्थाओं का फर्जीवाड़ा सामने आएगा उन पर कार्रवाई की जाएगी। ईपीएफ को लेकर एक कार्यशाला भी होगी, जिसमें नगर निगम कर्मचारी, कार्यदायी संस्थाएं और ईपीएफ के अधिकारी शामिल किए जाएंगे।
- यमुनाधर चौहान, डिप्टी कलेक्टर नगर निगम